परमाणु हथियारों पर भारत-पाक की खिंचाई

हिलरी क्लिंटन
Image caption हिलरी ने भारत और पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया

अमरीकी विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन ने कहा है कि जिस तरीक़े से भारत और पाकिस्तान ने परमाणु हथियार हासिल किए हैं उससे दुनिया में परमाणु हथियारों का संतुलन बिगड़ा है.

उनका कहना था कि अमरीका दोंनो देशों के साथ बातचीत कर रहा है जिससे उन्हें अपने परमाणु हथियारों के भंडारों को कम करवाने पर राज़ी कराया जा सके.

अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा, "परमाणु अप्रसार संधि के तीन हिस्से हैं, एक अप्रसार, एक परमाणु हथियार का शांतिपूर्ण उपयोग और तीसरा परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग. कुछ अन्य देशों जैसे भारत और पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों को इस तरह हासिल किया है जिससे विश्व में परमाणु हथियारों का संतुलन बिगड़ गया है."

हिलरी क्लिंटन केंटकी में लुईविल विश्वविद्यालय में परमाणु अप्रसार के मुददे पर भाषण दे रही थीं.

हिलरी ने कहा कि अमरीका भारत और पाकिस्तान दोंनो को इसीलिए इस बात पर राज़ी करने की कोशिश कर रहा है कि वह परमाणु हथियारों की संख्या कम करने में मदद करें.

कोशिश

उनका कहना था, "इसीलिए हम भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके परमाणु भंडार सुरक्षित रहें और उन हथियारों की संख्या में भी कमी लाने में हमारे साथ मिलकर काम करें."

भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश यह कह चुके हैं कि उनके परमाणु भंडार सुरक्षित हाथों में हैं. लेकिन पाकिस्तान के बारे में कई देशों को यह ख़तरा लगा रहता है कि परमाणु हथियार कहीं चरमपंथियों के हाथों में न पड़ जाएँ.

भारत भी पाकिस्तान में परमाणु हथियारों के ग़लत हाथों में पड़ जाने की बात करता रहा है और सोमवार को वॉशिंगटन में होने वाले दो दिवसीय परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में भी भारत इन्हीं ख़तरों की बात उठा सकता है.

हिलरी क्लिंटन ने यह भी कहा कि अमरीका रूस के साथ मिलकर अपने परमाणु भंडारों को कम करने की कोशिश भी जारी रखेगा.

अब ओबामा प्रशासन ने यह ऐलान भी कर दिया है कि अमरीका कोई नए परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.

लेकिन अमरीकी विदेश मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि जब तक दुनिया में परमाणु हथियार रहेंगे अमरीका अपने पास भी परमाणु हथियार रखेगा.

अमरीका पहुँचे मनमोहन सिंह

अंतरराष्ट्रीय परमाणु सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमरीका पहुंच गए हैं. सम्मेलन 12 और 13 अप्रैल को होगा, जिसमें 40 देशों से ज़्यादा के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा ले रहे हैं.

Image caption मनमोहन सिंह परमाणु सम्मेलन में हिस्सा लेंगे

मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि सम्मेलन में परमाणु आतंकवाद और परमाणु तकनीक के प्रसार को रोकने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

उनका कहना था, "संवेदनशील परमाणु सामग्री को ख़तरनाक हाथों में जाने से रोकना, परमाणु आतंकवाद जैसे मसलों पर पुख़्ता क़दम उठाने की ज़रूरत है."

उन्होंने यह भी कहा कि विकास की चुनौतियों का सामना करने में परमाणु ऊर्जा काफ़ी अहम है, और इसीलिए विकास में प्रगति तभी संभव होगी जब सारे देश परमाणु मामलों में सुरक्षा का ध्यान रखें.

सम्मेलन से पहले रविवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से भी मुलाक़ात करेंगे जिसमें विश्व और दक्षिण एशियाई क्षेत्र में सुरक्षा मामलों और आतंकवाद के अलावा अफ़ग़ानिस्तान में हालात और पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्तों के बारे में भी चर्चा होने की उम्मीद है.

भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अफ़गानिस्तान में वह विकास का काम जारी रखेगा.

भारत और पाकिस्तान दोनों ही का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में उनकी भूमिका अधिक होना चाहिए. जबकि अमरीकी इस बात की भी कोशिश कर रहे हैं कि कुछ तालेबान जो हिंसा का रास्ता छोड़ने को तैयार हों उनसे बातचीत भी की जाए और उन्हें मुख्यधारा में शामिल किया जाए.

भारत को इस बात पर भी ऐतराज़ है. उसका कहना है कि तालेबान में कोई अच्छे या बुरे तालेबान नहीं होते.

मुंबई हमलों में शामिल पाकिस्तानी मूल के अमरीकी नागरिक डेविड कोलमैन हेडली को भारत लाने का भी सवाल इस बैठक के दौरान उठाए जाने की संभावना है.

परमाणु सम्मेलन में भाग लेने पहुँचे पाकिस्तानी प्रधान मंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी भी अमरीकी राष्ट्रपति के साथ मुलाक़ात करेंगे.

अमरीकी दौरे के बाद मनमोहन सिंह ब्रिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए ब्राज़ील भी जाएँगे जहाँ वे चीन और रूस के राष्ट्रपति से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे.

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