'पाकिस्तान में आतंकवाद है बड़ा ख़तरा'

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मुंबई हमलों के साज़िशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमैन हेडली से पूछताछ के लिए भारत की मांग का समर्थन किया है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई बातचीत के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपना रुख़ स्पष्ट किया.

पिछले दिनों पाकिस्तानी मूल के अमरीकी नागरिक डेविड हेडली ने मुंबई हमलों के बारे में अपना दोष स्वीकार किया था.

दोष स्वीकार करने के बदले में यह सहमति हुई थी कि उन्हें भारत प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा और न ही उन्हें मौत की सज़ा दी जाएगी.

विदेश सचिव निरुपमा राव ने पत्रकारों को बताया कि राष्ट्रपति ओबामा के साथ मुलाक़ात के दौरान मनमोहन सिंह ने हेडली से पूछताछ का मुद्दा उठाया.

पूछताछ की प्रक्रिया

Image caption हेडली मुंबई हमलों में हाथ होने की बात कबूल चुके हैं.

निरुपमा राव ने कहा, "बराक ओबामा ने हमारे अनुरोध का समर्थन किया कि ऐसी पूछताछ का कुछ प्रावधान होना चाहिए."

हालाँकि निरुपमा राव ने इस मामले में किसी समयसीमा से इनकार किया लेकिन इतना ज़रूर कहा कि राष्ट्रपति ओबामा के मुताबिक़ अमरीका इस मुद्दे पर अपनी क़ानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत काम कर रहा है.

पिछले दिनों डेविड हेडली से पूछताछ को लेकर भारतीय मांग के प्रति अमरीका की उदासीनता को लेकर भारत में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी.

डेविड हेडली पर आरोप था कि उन्होंने मुंबई हमलों के स्थान तय करने में मदद की थी. 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए हमलों में 174 लोग मारे गए थे.

बाद में हेडली ने मुंबई हमलों में अपनी भूमिका अदालत में स्वीकार की थी.

आतंकवाद

भारतीय प्रधानमंत्री ने अमरीकी राष्ट्रपति का ध्यान पाकिस्तान में जारी आतंकवादी गतिविधियों की ओर दिलाया और कहा कि यह क्षेत्र के विकास में बाधक है.

उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए भारत और अमरीका को एक साथ होकर काम करना होगा.

भारतीय प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि दक्षिण एशिया का भविष्य इसी से तय होगा कि चरमपंथी गतिविधियों से किस तरह निपटा जाए.

वार्ता के दौरान पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा, हाफ़िज़ सईद और इलियास कश्मीरी की गतिविधियों का ज़िक्र आया.

मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की सरकार मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए गंभीर नहीं है.

उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में भारत और अमरीका की साझीदारी अहम हो सकती है.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि वह भारत की चिंताएँ समझते हैं और वे इस सिलसिले में पाकिस्तान से बात कर रहे हैं.

अन्य मुद्दे

दोनों नेताओं ने पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी नीति के साथ-साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया.

Image caption मनमोहन सिंह ब्रिक देशों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, विदेश सचिव निरुपमा राव और अमरीका में भारत की राजदूत मीरा शंकर भी मौजूद थी.

जबकि अमरीकी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन, व्हाइट हाउस चीफ़ ऑफ़ स्टॉफ़ आर एमानुएल और राजनीतिक मामलों के विदेश उप मंत्री विलियम बर्न्स शामिल थे.

पिछले पाँच महीने में दूसरी बार मनमोहन सिंह और बराक ओबामा की मुलाक़ात हुई है. रविवार को ब्लेयर हाउस में दोनों नेताओं के बीच बैठक हुई.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान को अमरीका की ओर से मिलने वाली सैन्य सहायता का मुद्दा उठाया.

भारत हमेशा ये कहता रहा है कि पाकिस्तान अमरीकी की ओर से मिलने वाली सैनिक और वित्तीय सहायता का इस्तेमाल भारतीय हितों के ख़िलाफ़ करता है.

दोनों नेताओं ने अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर भी बातचीत की. कुछ महीने पहले ही राष्ट्रपति ओबामा ने अफ़ग़ानिस्तान में नई रणनीति की घोषणा की थी, जिसके तहत अमरीका वहाँ 30 हज़ार और सैनिक भेजेगा.

विवादित परमाणु जवाबदेही विधेयक का मुद्दा भी बातचीत के दौरान उठा. भारत में इस विधेयक का कई राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बैठक में उम्मीद जताई है कि ये विधेयक जल्द से जल्द पास हो जाएगा. उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा को बताया कि ये विधेयक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से गुज़र रहा है.

दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते पर प्रगति के बारे में भी चर्चा हुई.

भारत ने अफ़ग़ानिस्तान का मुद्दा भी उठाया और मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत अफ़ग़ानिस्तान में अपनी भूमिका निभाता रहेगा.

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