पाकिस्तान से गंभीर वार्ता संभव नहीं:मनमोहन

  • 14 अप्रैल 2010
Image caption मनमोहन सिंह का बयान ऐसे समय में आया है जब पिछले महीने ही दोनों देशों के बीच बातचीत हुई है.

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान मुंबई हमलों के दोषियों को सज़ा देने के लिए विश्वसनीय क़दम नहीं उठाता है तब तक उसके साथ किसी तरह की गंभीर बातचीत नहीं हो सकती.

उनका बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सचिव स्तरीय बातचीत हो चुकी है.

अमरीका की राजधानी वॉशिंगटन में परमाणु सुरक्षा सम्मेलन ख़त्म होने के बाद प्रेस कॉंफ़्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई हमलों की साजिश में शामिल लश्करे तैबा पाकिस्तान में स्वच्छंद तरीके से अपनी गतिविधियाँ चला रहा है.

सम्मेलन के दौरान ही मनमोह सिंह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के साथ दो बार मिल चुके हैं लेकिन इन संक्षिप्त मुलाक़ातों में कोई सार्थक बातचीत नहीं हो सकी.

इसके बारे में ख़ुद उन्होंने बताया, "मैंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित होने पर बधाई दी जिससे मुझे लगता है कि पाकिस्तानी राजनीतिक प्रणाली में प्रधानमंत्री की स्थिति और मज़बूत हुई है. इसके अलावा किसी और मुद्दे पर गंभीर बातचीत नहीं हुई."

ग़ौरतलब है कि पिछले साल शर्म अल शेख में गिलानी-मनमोहन ने साझा बयान जारी किया था और इसे मुंबई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच पहला उच्चस्तरीय संपर्क माना जा रहा था.

हालाँकि बयान में बलूचिस्तान में चरमपंथियों की मदद में भारत का हाथ होने की चर्चा को लेकर विपक्ष ने साझा बयान की आलोचना की थी.

लेकिन संसद में विपक्षी हमलों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया था कि पाकिस्तान के साथ आगे बढ़ने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है. उसके बाद दोनों देशों के बीच सचिव स्तर की बातचीत भी हो चुकी है.

लश्करे तैबा

भारत शुरु से कहता रहा है कि मुंबई हमलों में पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा का हाथ है.

प्रेस कॉंफ़्रेस में मनमोहन ने स्पष्ट कहा, "हम पाकिस्तान से उम्मीद करते हैं कि कम से कम वह जघन्य हमलों के दोषियों को सज़ा दिलाए और इसके लिए प्रभावशाली क़दम उठाए. कम से कम इतना हम पाकिस्तान से चाहते हैं. अगर पाकिस्तान ऐसा करता है तो हम खुशी-खुशी एक बार फिर सभी मुद्दों पर बातचीत शुरु कर सकते हैं."

हालाँकि यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने लश्कर के ख़िलाफ़ क़दम उठाए हैं, ये संगठन प्रतिबंधित है और इसके बैंक खाते भी सील किए जा चुके हैं.

उन्होंने कहा था कि भारत को इस सिलसिले में और सबूत देने की ज़रुरत है.

जबकि मनमोहन सिंह ने तल्ख़ अंदाज़ में आरोप लगाया कि लश्कर के बड़े नेता पाकिस्तान में बेरोक टोक घूम रहे हैं और अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी इसका संबंध अल क़ायदा से होने के संकेत दे चुकी है.

उन्होंने और सबूतों की ज़रुरत को नकारते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता इस मुद्दे पर मुझे गिलानी को और सबूत देने की ज़रूरत है."

मनमोहन सिंह ने सम्मेलन के दौरान अन्य देशों के नेताओं से बातचीत का ज़िक्र किया और कहा कि उनसे सार्थक बातचीत हुई.

जब उनसे ये पूछा गया कि पाकिस्तान ने अमरीका के साथ भारत की तरह का असैनिक परमाणु सहयोग समझौता करने की माँग की है, तब उनका कहना था, "मैं पाकिस्तान और अमरीका के बीच क्या हो रहा है, इसमें हस्तक्षेप करने वाला कौन होता हूं."

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