जॉर्ज वाशिंगटन पर लाखों डालर जुर्माना

जॉर्ज वाशिंगटन

न्यूयॉर्क की सबसे पुरानी लाइब्रेरी के प्रबंधकों का कहना है कि अमरीका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन ने 1789 में इस लाइब्रेरी से दो किताबें ली थीं लेकिन वापस नहीं लौटाईं.

न्यूयॉर्क सोसाइटी लाइब्रेरी के अनुसार मुद्रास्फिति की दर को नज़र में रखते हुए 220 वर्ष में इन किताबों के वापस न करने पर जॉर्ज वाशिंगटन को तीन लाख डॉलर का जुर्माना हो चुका है.

फिर भी लाइब्रेरी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें जुर्माने की राशि से कोई मतलब नहीं है वे सिर्फ़ अपनी किताबें वापस चाहते हैं.

कहा जाता है कि जॉर्ज वाशिंगटन कभी झूठ नहीं बोलते थे लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उनकी भी कुछ कमज़ोरियाँ थीं.

वाशिंगटन में बीबीसी संवाददाता मेडलिन मौरिस के अनुसार जॉर्ज वाशिंगटन ने पांच अक्तूबर 1789 को उस समय मैनहटन की एक मात्र लाइब्रेरी से जो दो किताबें ईश्यु करवाईं थीं उनमें से एक ब्रितानी संसद में होने वाली बहस का पाठ था और दूसरी किताब अंतरराष्ट्रीय विषय से संबंधित 'लॉज़ ऑफ़ नेशन्स' थी.

जॉर्ज वाशिंगटन ने इन किताबों को इश्यु कराते हुए अपना नाम भी नहीं लिखा था बल्कि उनके एक साथी ने किताब लेने वाले व्यक्ति के नाम की जगह पर "राष्ट्रपति" लिख दिया है.

ये दोनों किताबें एक महीने बाद वापस होनी थीं लेकिन ये किताबें नहीं लौटाई जा सकीं और इसी कारण उस ज़माने से उन पर लेट-फ़ीस लगाई जा रही है.

लाइब्रेरी वालों को इस बात की जानकारी उस समय हुई जब वे उस समय के रजिस्टर के आंकड़ों को कंप्यूटर पर डाल रहे थे.

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