उड़ानें शुरु होने की उम्मीद

विमानतल पर फँसे लोग
Image caption दुनिया भर के हवाई अड्डों पर लोग फँसे हुए हैं

आइसलैंड में फट पड़े ज्वालामुखी की राख अब धीरे-धीरे छँट रही है और यूरोपीय अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि सोमवार से यूरोप में आधी उड़ानें फिर से शुरु हो सकेंगीं.

यूरोप की ट्रैफ़िक एजेंसी यूरोकंट्रोल से हुई बातचीत के बाद यूरोपियन ट्रांसपोर्ट कमीश्नर ने यह बात कही है.

हालांकि एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा है कि राख छँटने का मतलब यह नहीं है कि आधी उड़ानें शुरु हो सकेंगीं.

आइसलैंड में ज्वालामुखी से राख उठने के बाद गुरुवार से पूरी उत्तरी यूरोप में हवाई यातायात बाधित हुआ है.

अभी तक ज्वालामुखी से निकल रही राख के कारण कम से कम 17 हज़ार विमान सेवाएं रद्द हुई हैं.

इसे पूरी दुनिया में हवाई अड्डों में लोग फँसे हुए हैं और करोड़ों डॉलर का नुक़सान हुआ है.

इस बीच कई एयरलाइनों ने हवाई सेवाओं में कटौती पर सवाल उठाए हैं.

हॉलैंड की एयरलाइन केएलएम, जर्मनी की दो बड़ी एयरलाइनें लुफ़्तांसा और एयर बर्लिन, ब्रिटिश एयरवेज़ और एयर फ़्रांस ने परीक्षण के तौर पर उडा़नें भरी हैं और उन्होंने कहा है कि अब उड़ान भरने में कोई दिक़्कत नहीं है.

ज्वालामुखी

आइसलैंड में पिछले दो सौ साल से सोया हुआ एक ज्वालामुखी पिछले सप्ताह गुरुवार को फिर से फट पड़ा जिससे हवाई यातायात पर गंभीर असर पड़ा है.

पिछले एक महीने में दूसरी बार फटे इस ज्वालामुखी से निकल रहे राख और धुएँ के बादल साढ़े आठ किलोमीटर ऊपर तक देखे जा रहे हैं.

आइसलैंड में वैज्ञानिकों ने आशा जताई है कि हवा चलने के कारण आसमान थोड़ा साफ़ होने से वे ज्वालामुखी के ऊपर जाकर ये पता लगा सकेंगे कि ज्वालामुखी से कितनी बर्फ़ पिघली है.

आइसलैंड का ये ज्वालामुखी अंतिम बार 1821 में फटा था और तब वो कोई एक वर्ष से भी अधिक समय तक सुलगता रहा था.

आइसलैंड मध्य अटलांटिक पट्टी में पड़ता है जो यूरेशिया और उत्तर अमरीका महाद्वीपों की पट्टी की सीमा पर पड़ता है जहाँ ज़मीन के भीतर काफ़ी हलचलें आती रहती हैं.

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