पहले विमान ने उड़ान भरी

विमान
Image caption विंमान सेवाओं के बाधित होने के कारण लाखों की संख्या में यात्रियों को दिक्कतें हुई हैं.

आइसलैंड के ज्वालामुखी की राख के कारण पूरे उत्तरी यूरोप में छह दिनों तक हवाई यात्रा पर रोक के बाद अब पहले विमान ने उड़ान भरी है.

एमस्टर्डम के स्कीपो एयरपोर्ट से तीन विमानों ने न्यू यॉर्क, शंघाई और दुबई के लिए उड़ानें भरीं.

जर्मनी की लुफ्तांसा एयरलाइंस का कहना है कि उनके कुछ विमानों ने भी सोमवार की शाम फ्रैंकफर्ट से उड़ानें शुरु की हैं.

सोमवार को यूरोपीय संघ के परिवहन मंत्रियों की बैठक हुई थी जिसमें हवाई यात्रा पर लगी कुछ पाबंदियों को हटाने पर सहमति हुई थी.

अब नई सहमति के अनुसार उत्तरी यूरोप में तीन ज़ोन बने हैं. पहला जहां ज्वालामुखी की राख का प्रभाव अधिक होगा वहां उड़ानें बिल्कुल नहीं होंगी. दूसरा ज़ोन कम प्रभाव का है जहां में कुछ विमानें जाएंगी जबकि तीसरा ज़ोन सभी विमानों के लिए खुला होगा.

ब्रिटेन में वायु यातायात को नियंत्रण करने वाली नेशनल एयर ट्रैफिक सर्विसेज़ (एनएटीएस) का कहना है कि नए सबूतों के अनुसार आइसलैंड के दक्षिण और पूर्व में ज्वालामुखी की राख फैल रही है.

एनएटीएस ने अपने ताज़ा बुलेटिन में कहा है कि मंगलवार को कुछ हवाई अड्डों से विमान सेवाएं शुरु हो सकती है लेकिन वो लंदन के आसपास के हवाई अड्डे ही होंगे.

आइसलैंड में ज्वालामुखी की राख पर नज़र रख रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि अब ज्वालामुखी दूसरे दौर में है जहां राख से अधिक लावा निकल रहा है.

यह ज्वालामुखी अभी भी सक्रिय है जिसके कारण यह आस पास किसी और ज्वालामुखी में विस्फोट का कारण बन सकता है.

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