उड़ानें सामान्य, आरोप प्रत्यारोप शुरू

आयसलैंड के ज्वालामुखी के कारण यूरोप के हवाई अड्डों पर लगभग एक सप्ताह की अभूतपूर्व बाधा पर अब आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.

एयरलाइंस की प्रतिनिधि संस्था, अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात संघ का कहना है कि सरकारों के ग़लत फ़ैसले के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई और उन्होंने मुआवजे की माँग की है.

उनका कहना है कि इससे विभिन्न एयरलाइंस को दो अरब डॉलर का घाटा हुआ है. उनका आरोप है कि सरकारों के ग़लत फ़ैसले से हालात और बिगड़े.

दूसरी ओर स्विटजरलैंड के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में एयरलाइंस के इस रुख़ को ग़लत ठहराया है और कहा है कि ज्वालामुखी से उड़ी राख से भारी ख़तरा था.

अन्य वैज्ञानिकों का कहना है कि उड़ानों को रोकना ज़रूरी था क्योंकि ज्वालामुखी की राख के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही थी.

इधर यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि अभूतपूर्व बाधा के बाद गुरुवार को हवाई सेवाएँ पूरी तरह से सामान्य हो जाएंगी.

ऐसा अनुमान है कि बुधवार को सामान्य से केवल तीन चौथाई विमानों ने उड़ानें भरीं. इस दौरान सभी उड़ानें खचाखच भरी हुईं थीं.

समस्या ये है कि अब भी हज़ारों यात्री विभिन्न विमान अड्डों पर फंसे हुए हैं.

पिछले गुरुवार से एयर इंडिया और जेट एयरवेज़ ने यूरोप के लिए उड़ानें बंद कर दी थीं लेकिन अब उन्होंने कहा है कि वे यूरोप की ओर दोबारा विमान उड़ाने के लिए तैयार हैं.

मंगलवार को एयर फ़्रांस ने भारत से पेरिस और लुफ़थांसा ने भारत से म्यूनिक के लिए हवाई सेवा शुरु की थी.

भारी भीड़

लेकिन पिछले एक हफ़्ते की अफ़रातफ़री के कारण इतने यात्री हवाई अड्डों पर और अलग-अलग जगहों पर जाने के लिए कतार में हैं कि एयरलाइंस को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

माना जा रहा है कि ये समस्या कई दिनों तक चल सकती है.

मंगलवार देर रात ब्रिटेन में लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतरना शुरु किया था.

फ्रांस, बेल्जियम और नीदरलैंड्स से भी विमानों ने उड़ानें भरी थीं.

यूरोकंट्रोल एयर ट्रैफ़िक एजेंसी ने उम्मीद जताई है कि स्थिति सामान्य होने में कुछ दिन लगेंगे.

यातायात क्षेत्र के पर्यवेक्षकों का कहना है कि जिन लोगों के पास वर्तमान तारीखों की टिकट हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी और जो लोग उड़ानें रद्द होने से प्रभावित हुए हैं, उन्हें प्रतीक्षा सूची में रखा जाएगा.

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