रेलवे को हुआ करोड़ों का नुक़सान

नक्सली हमला
Image caption बीते साल रेलवे पर माओवादी हमलों में बढ़ोत्तरी हुई है

रेल मंत्री ममता बैनर्जी का कहना है कि वर्ष 2009 में रेल संपत्ति पर माओवादी हमलों में क़रीब दोगुना वृद्धि दर्ज की गई और नक्सली तोड़फोड़ की वजह से 500 करोड़ से ज़्यादा का नुक़सान हुआ है.

राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि रेल नक्सलियों के निशाने पर है.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में रेलगाड़ियों पर 30 माओवादी हमले हुए थे लेकिन अगले साल हमलों की संख्या बढ़कर 58 हो गई.

उनका कहना है कि वर्ष 2007 में 56 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे.

सुरक्षा

ममता बैनर्जी ने कहा कि करीब 65 हज़ार किलोमीटर लंबी रेल लाईन के हर इंच की देखभाल करना नामुमकिन है, लेकिन सरकार हरसंभव कोशिश करेगी.

उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था का विषय राज्यों के सुपुर्द है और रेल मंत्रालय ज़्यादा कुछ नहीं कर सकती क्योंकि रेल सुरक्षा बल के जवानों की संख्या सीमित है.

नक्सली हमलों के दौरान हुए बंद, रेल-रोको आंदोलनों आदि की वजह से कई रेलगाड़ियाँ प्रभावित हुईं. ये हमले आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ राज्यों में हुए.

ममता बनर्जी ने बताया कि नक्सलियों के बंद और आंदोलनों की वजह से यात्रियों की आवाजाही और माल ढोने के काम पर भी असर पड़ा.

नक्सली गतिविधियों की वजह से प्रभावित होने वाले रेल ज़ोन हैं धनबाद, मुगलसराय, दानापुर (पूर्वी-मध्य रेल), आसनसोल, मालदा (पूर्वी रेल), रांची, आद्रा, खड़गपुर और चक्रधरपुर (दक्षिणी-पूर्वी रेल), वाल्टेयर, संबलपुर (पूर्वी-तट रेल) और गुंतकाल, सिकंदराबाद और गुंटूर (दक्षिणी-मध्य रेल).

रेल मंत्री ने कहा कि राजधानी एक्सप्रेस और दूसरी मुसाफ़िर गाड़ियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए गए हैं, हालांकि राजधानी और दूसरी सुपर-फ़ास्ट गाड़ियों की गति निर्धारण पर कोई फ़ैसला नहीं किया गया है.

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