बायोबैंक की ऐतिहासिक परियोजना

ख़ून के नमूने
Image caption ये गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए अब तक का सबसे बड़ा अध्ययन

ब्रिटेन की एक ग़ैर-सरकारी संस्था यूके बायोबैंक का कहना है कि गंभीर बीमारियों पर शोध की एक ऐतिहासिक परियोजना में लगभग पाँच लाख लोग हिस्सा लेंगे.

बायोबैंक को उम्मीद है कि इस परीक्षण के बाद ये पता लगाया जा सकेगा कि क्यों कुछ लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो जाती हैं और कुछ लोग क्यों बचे रहते हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस परीक्षण के दौरान 30 साल की अवधि में लोगों के जीन, जीवन शैली और स्वास्थ्य का अध्ययन किया जाएगा.

बायोबैंक की ये अब तक की सबसे बड़ी और व्यापक स्वास्थ्य परियोजना है.

बायोबैंक परियोजना में 40 से लेकर 69 साल तक के लोगों को हिस्सा लेने का न्यौता दिया गया है.

यूके बायोबैंक के प्रमुख वैज्ञानिक डॉक्टर टिम स्प्रोसैन का कहना है, "हम लोग ये पता लगाने की कोशिश करेंगे कि 40 साल की उम्र पार करते ही हम में से कुछ लोग क्यों कैंसर, हृदयरोग, गठिया और डिमैंशिया जैसे रोगों का शिकार हो जाते हैं. हम इन रोगों के ख़तरे का पता लगाकर ऐसे उपाय खोजेंगे, जिनसे ये रोग हमें घेर ही न पाएं."

इन परीक्षणों में भाग लेने वालों के, रक्त, थूक, मूत्र आदि के नमूने बहुत बड़े भंडार बैंक में रखे जाएँगे और उन पर कई सालों तक ये अध्ययन किया जाएगा.

लेकिन इस परियोजना के आलोचकों ने इस अध्ययन के ख़तरों की तरफ़ संकेत करते हुए कहा है कि जो जानकारी एकत्र की जा रही है वह ज़रूरी नहीं कि सुरक्षित हो और बिना लोगों के नाम दिए भी एकत्र जानकारी दवा बनाने वाली कंपनियों द्वारा ग़लत तरीके से इस्तेमाल की जा सकती है.

जीनवॉच यूके संस्था की डॉक्टर हेलेन वॉलेस का कहना है, "जीन संरचना के अध्ययन से लोगों की संभावित बीमारियों का अनुमान लगाना कोई सही प्रक्रिया नहीं है, इससे तो भय का माहौल बनने लगेगा."

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