हेडली से पूछताछ के लिए प्रयास

  • 24 अप्रैल 2010
हेडली
Image caption डेविड हेडली से पूछताछ के मामले में अमरीका का रवैया ढुलमुल सा रहा है

भारतीय क़ानून मंत्रालय के मुताबिक सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम आज सुबह वाशिंगटन के लिए रवाना हुए हैं, जहाँ वह अमरीकी न्याय मंत्रालय के अधिकारियों से बातचीत करेंगें.

समझा जाता है कि उनकी बातचीत का अहम हिस्सा अमरीकी नागरिक डेविड कोलमन हेडली के संबंध में होगा.

भारत नवम्बर 2008 के मुंबई हमलों के सिलसिले में डेविड हेडली से पूछताछ करना चाहता है.

अमरीकी नागरिक और चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैबा के सदस्य बताए जाने वाले डेविड हेडली पर मुंबई हमलों की साज़िश और उनकी तैयारी करने के आरोप हैं.

सॉलिसिटर जनरल की यह यात्रा भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमरीका यात्रा के कुछ ही दिनों बाद हो रही है.

अप्रैल के दूसरे हफ़्ते में अपने दौरे के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि भारत को डेविड हेडली से पूछताछ का मौक़ा मिलेगा.

अमरीका के भारत में राजदूत तिमोथी रोमर ने हाल में बयान दिया था कि अमरीका में इस मामले पर ‘उच्च स्तर’ पर कोशिश जारी है.

मुंबई हमलों की जांच के दौरान अमरीकी नागरिक का नाम आने के बाद से भारत अमरीका के साथ बार बार इस मामले को उठाता रहा है.

भारतीय क़ानून मंत्रालय पर पैनी नज़र रखने वाले हिन्दू अख़बार के विनय कुमार कहते हैं "राजनायिक स्तर के अलावा, गृह मंत्री ने ख़ुद अमरीका के सॉलिसिटर जनरल से इस मामले में बात की और फिर यह मामला मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति बराक ओबामा की मुलाक़ात के दौरान उठा."

भारत कहता रहा है कि मुंबई हमलों की साज़िश, ट्रेनिंग और हमलों में शामिल बंदूकधारियों की हैंडलिंग पाकिस्तान की सरज़मीन से हुई थी.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी कहा कि डेविड हेडली नाम का एक अमरीकी नागरिक हमलों के पहले कई दफ़ा भारत आया था और उसने पाकिस्तान स्थित गुटों के लिए सूचनाएँ एकत्र की थी.

पाकिस्तानी मूल के अमरीका निवासी डेविड हेडली को अमरीकी जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो आफ इंवेस्टिगेशन यानी एफ़बीआई ने पिछले साल अक्तूबर में गिरफ्तार किया था.

उसके बाद इस तरह की खबरें आईं कि डेविड हेडली ने हुकूमत के साथ एक समझौते के तहत अपना अपराध स्वीकार कर लिया है.

अमरीकी क़ानून में ये प्रावधान है जिसके तहत इस तरह के समझौते के भीतर अपराधी के साथ मुकदमे में रियायत बरती जा सकती है.

अपनी यात्रा के दौरान सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम अमरीकी हुकूमत और डेविड हेडली के बीच हुए समझौते को दोनों देशों के बीच मौजूद प्रत्यर्पण संधि की रौशनी में देखेंगें.

साथ ही साथ वह यह भी देखने की कोशिश करेंगें कि अमरीका के क़ानून के भीतर भारत की पूछताछ की मांग को किस तरह की जगह मिल सकती है और उसे किस तरह से बेहतर नतीजे तक पहुँचाया जा सकता है.

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