'ग़ुलाम' बनाकर जान ली

  • 26 अप्रैल 2010
Image caption माइकल गिलबर्ट के हत्यारे नताशा ओल्डफ़ील्ड, जेम्स वाट और निकोला रॉबर्ट्स

बरसों के उत्पीड़न, अपमान और ग़ुलामी के बदले गिलबर्ट को मिली भयानक और वीभत्स मौत.

ब्रिटेन की एक अदालत ने ग़ुलाम बना कर रखे गए माइकल गिलबर्ट की हत्या के लिए तीन लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.

ब्रिटेन के लूटन शहर में एक परिवार ने ग़ुलाम बना कर रखे गए 26 वर्षीय माइकल गिलबर्ट को बरसों तक भयानक यातनाएं देकर मार डाला.

मई 2009 में माइकल का सर कटा और क्षत विक्षत शव बैडफोर्डशायर की ब्लू लैगून झील के इलाके में पाया गया.

इस मुक़दमे में मुख्य अभियुक्त जेम्स वॉट को कम से कम 36 साल, उनकी महिला मित्र नताशा ओल्फील्ड को 18 साल और निकोला रौबर्ट्स को 15 साल जेल की सज़ा काटनी होगी.

अदालत में बताया गया कि वॉट परिवार के सदस्य और मित्र अपने मनोरंजन के लिए माइकल को भीषण यातनाएं देते थे.

वॉट भाइयों की माँ जैनेफ़र स्मिथ डेनीस सहित परिवार के कई सदस्यों और मित्रों को भी इस मामले में छह महीने से लेकर 10 साल की जेल की सज़ा दी गई है.

ग़ुलामी

मुक़दमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश जॉन बेवन ने वॉट भाइयों की माँ से कहा कि उसने एक 'बर्बर' और 'शैतान' परिवार को जन्म दिया है.

मुक़दमे के दौरान अदालत में ये सामने आया कि गिलबर्ट 15 साल की आयु में एक बाल सुधार गृह में जेम्स वॉट से मिले थे.

पुलिस का कहना है कि वॉट परिवार ने उसके बाद गिलबर्ट को वर्षों तक ग़ुलाम बना कर रखा और उन्हें शारीरिक यातनाएं दीं.

अदालत मे ज्यूरी को बताया गया कि माइकल गिलबर्ट ने दो बार वॉट परिवार के चंगुल से भागने की भी कोशिश की, लेकिन वॉट परिवार ने उनके सरकारी भत्ते के ब्यौरे के ज़रिए, उन्हें फिर से पकड़ लिया.

जॉन बेवन ने कहा, "अब तक के कार्यकाल में मेरे पास नाममात्र के ही ऐसे मामले आए होंगे जिन्हें वीभत्स कहा जा सके, और ये मामला उसी श्रेणी में आता है."

उत्पीड़न

मुक़दमे के दौरान सरकारी वकील स्टुअर्ट ट्रिमर ने कहा कि गिलबर्ट से उसका सरकारी भत्ता छीन लिया जाता था और उसे हथकड़ी लगाकर बिस्तर पर सोने को मजबूर किया जाता था.

ट्रिमर ने कहा कि गिलबर्ट को लातों और घूंसों के अलावा चाकू, बेसबॉल बैट और स्नूकर बॉल से मारा जाता था और जबरन अपना मूत्र पीने पर मजबूर किया जाता था.

ट्रिमर का कहना था कि माइकल गिलबर्ट को खौलते पानी के नल के नीचे उलटा लटका दिया जाता था.

पुलिस के मुताबिक माइकल को यातनाएं देते समय अक्सर मोबाइल पर फ़िल्म बनाई जाती थी.

मासूम इंसान

हत्या का अपराध पहले ही स्वीकार कर चुके रिचर्ड वॉट ने अदालत में बताया, "एक दिन मैंने गिलबर्ट से पूछा कि वो क्यों ये सब यातनाएं सहता है, तो उसने कहा, मैं इस परिवार से प्यार करता हूं आप सब लोग ही तो मेरा परिवार हो."

न्यायाधीश जॉन बेवन ने कहा कि गिलबर्ट को बेहद क्रूर, एकाकी और हिंसक मौत मिली.

न्यायाधीश ने कहा, "सभ्य समाज में इस तरह का अमानवीय व्यवहार कैसे होने दिया गया, ये हैरानी की बात है."

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