सरकार सुरक्षित, कटौती प्रस्ताव गिरा

  • 27 अप्रैल 2010
Image caption विपक्ष की मांग थी कि पेट्रोलियम पदार्थों पर 10 प्रतिशत उत्पाद शुल्क को वापस लिया जाए.

सरकार के ख़िलाफ़ विपक्ष का कटौती प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया है.

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने पेट्रोल और डीज़ल के बढ़े दामों से जुड़ा कटौती प्रस्ताव सामने रखा लेकिन वो पास नहीं हो सका.

वाम नेता गुरदास दासगुप्ता का लाया हुआ कटौती प्रस्ताव भी पास नहीं हो पाया.

इससे पहले समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के सांसदों ने लोकसभा से वॉकआउट किया.

संसद में बजट पेश करने के बाद उसके पारित होने से पहले विचार विर्मश के दौरान अनुदान मांगों में कटौती के लिए कटौती प्रस्ताव लाया जा सकता है.

इसके पारित हो जाने से सरकार गिर सकती है.

विपक्ष की मांग है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत पर 10 प्रतिशत उत्पाद शुल्क को वापस लिया जाए.

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के मुताबिक आखिरी बार 1946 में तीन कटौती प्रस्ताव पास हुए थे और आज़ादी के बाद कोई भी कटौती प्रस्ताव पास नहीं हुआ है हालांकि कटौती प्रस्ताव कई बार लाए जा चुके हैं.

विशेषाधिकार प्रस्ताव

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसदों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा अध्यक्ष के सामने रखा.

दरअसल विपक्ष फ़ोन टैपिंग और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) मामलों पर संयुक्त संसदीय समिति बनाने की मांग कर रहा है. भाजपा का कहना है कि ऐसे वक्त जब सत्र चल रहा है, प्रधानमंत्री ने विपक्ष की मांग पर अपनी प्रतिक्रिया संसद के बाहर व्यक्त की.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया है.

भाजपा सांसदों ने लोकसभा महासचिव पीडीटी आचरी को अपनी याचिका सौंपी है. इससे पहले लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि संसद के बाहर प्रधानमंत्री का बयान सदन का अनादर है और प्रधानमंत्री को सदन में वक्तव्य देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि ये एक गंभीर मुद्दा है क्योंकि कैबिनेट मंत्रियों के फ़ोन को भी कथित तौर पर टैप किया गया.

भाजपा नेता अनंत कुमार ने कहा कि जब संसद में आईपीएल पर चर्चा चल रही थी और विपक्ष ने इस पर संयुक्त संसदीय समिति की मांग की, तब प्रधानमंत्री ने संसद के बाहर इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि इसकी कोई ज़रूरत नहीं है.

हंगामा

संसद में मंगलवार को महंगाई को लेकर ज़बरदस्त हंगामा हुआ और दोनो सदनों को बार-बार स्थगित करना पड़ा.

Image caption विपक्ष ने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ भी विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा अध्यक्ष को दिया है.

लोकसभा में विपक्ष ने महंगाई को लेकर नारेबाज़ी की. उनका कहना था कि जब भी कांग्रेस सरकार आती है, महंगाई आसमान छूने लगती है. राज्यसभा में भी वाम दलों, एआईएडीएमके, भाजपा समेत विपक्षी दलों ने महंगाई के खिलाफ़ सरकार को घेरने की कोशिश की.

सरकार का समर्थन करने का फ़ैसला करने के बाद बहुजन समाजवादी पार्टी ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया.

संसद की कार्रवाई शुरू होने से पहले राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने संसद में महात्मा गाँधी की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन किया.

बाद में वाम दल, बीजू जनता दल, तेलगू देशम और दूसरे दलों के सांसद भी विरोध प्रदर्शन में साथ आ गए.

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