ब्रिटेन की सबसे पुरानी पार्टी

डेविड कैमरून
Image caption डेविड कैमरून ने टोरी पार्टी की रूढ़ीवादी छवि को बदलने की कोशिश की है

कंज़र्वेटिव पार्टी यूरोप की सबसे पुरानी पार्टी होने का दावा कर सकती है जिसने अपने लंबे अतीत में कई बदलाव देखे हैं, कई दौर देखे हैं.

पार्टी के जन्म के तार 'टोरी' गुट से खोजे जा सकते हैं जो 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में प्रकट हुआ.

टोरी राजशाही के समर्थक थे और ये विश्वास करते थे कि राजशाही संसद और उनके विरोधी धड़े व्हिग पर लगाम लगा सकती है.

आज भी कंज़र्वेटिव पार्टी राजशाही की प्रबल भक्त मानी जाती है.

18वीं शताब्दी में सत्ता प्रायः व्हिग धड़े के हाथ रही लेकिन 1783 में टोरी उभरे और उन्होंने 1830 तक शासन किया.

पहले विलियम पिट द यंगर प्रधानमंत्री बने और इसके बाद लॉर्ड लिवरपूल.

विलियम पिट ने मुक्त व्यापार और वित्तीय व्यवस्था का समर्थन किया और आधुनिक कंजर्वेटिव भी इसको मानते हैं. पार्टी इस बात का पुरज़ोर समर्थन करती है कि सत्ता को निजी उद्यम में दखल नहीं देना चाहिए.

कंज़र्वेटिव

1830 में पहली बार इस राजनीतिक आंदोलन के लिए कंजर्वेटिव शब्द का इस्तेमाल हुआ.

मगर उनके लिए अभी भी टोरी शब्द प्रचलित है जो किए एक आयरिश शब्द है जिसका अर्थ होता है 'लुटेरा'.

19वीं शताब्दी के मध्य में प्रधानमंत्री सर रॉबर्ट पील के काल में मुक्त व्यापार और कृषि को संरक्षण के सवाल पर मतभेद के कारण पार्टी टूट गई.

कंजर्वेटिव पार्टी का आधुनिक इतिहास डिज़राइली युग से शुरू होता है. वैसे तो कई लोगों ने पार्टी निर्माता होने का दावा किया मगर बेंजामिन डिज़राइली का दावा सबसे शक्तिशाली मालूम होता है.

1874-1880 तक का डिज़राइली का शासनकाल कंज़र्वेटिव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण रहा जब पार्टी की घरेलू नीतियों ने शहरी निम्न और मध्यम वर्ग में पैठ बनाई.

आर्थिक कारणों और लिबरल पार्टी के बढ़ते प्रभाव के कारण कंज़र्वेटिव 1880 में हार गए.

गठबंधन सरकार

फिर 1886 में लिबरल पार्टी से अलग होकर निकले एक गुट ने टोरियों से हाथ मिलाया और इसके बाद 1886 से 1906 तक ये गठबंधन सत्ता में रहा.

सैलिसबरी इस दौरान तीन बार और लगभग 14 वर्ष तक प्रधानमंत्री रहे.

गठबंधन सरकार में लिबरल पार्टी के नेता विलियम ग्लैडस्टोन भी प्रधानमंत्री बने.

1902 में सैलिसबरी के भतीजे आर्थर जेम्स बैल्फ़ोर फिर कंज़र्वेटिव प्रधानमंत्री बने.

1902 से 1914 तक का काल कंज़र्वेटिव पार्टी के लिए अच्छा नहीं रहा.

फिर पहला विश्ववयुद्ध छिड़ा जिस दौरान पार्टी की हालत सुधरी.

1915 में कंज़र्वेटिव पार्टी फिर लिबरल पार्टी से गठबंधन के लिए तैयार हो गई मगर प्रधानमंत्री लिबरल पार्टी का रहा.

गठबंधन समाप्त

1920-21 में आर्थिक मुद्दों पर असहमति के कारण गठबंधन ख़त्म हो गया.

कंज़र्वेटिव इतिहास में ये एक प्रमुख घटना थी जिसके बाद पार्टी पर ऐसे नेताओं का प्रभाव हुआ जो गठबंधन के विरोधी थे.

1922 में एंड्र्यू बोनार लॉ कंज़र्वेटिव प्रधानमंत्री बने जिनकी मृत्यु के बाद स्टैनली बाल्डविन ने बागडोर संभाली.

बाल्डविन के नेतृत्व में पार्टी आगे बढ़ी और 1918 से 1945 के बीच केवल ढाई वर्ष छोड़कर अधिकतर समय हाउस ऑफ़ कॉमंस में कंज़र्वेटिव पार्टी ही सबसे बड़ी पार्टी रही.

बीच में 1931 में एक बार फिर गठबंधन सरकार बनी और कंज़र्वेटिव पार्टी ने पहले लेबर प्रधानमंत्री रैम्से मैकडॉनल्ड का नेतृत्व स्वीकार किया.

1937 में बाल्डविन ने प्रधानमंत्रित्व और पार्टी का नेतृत्व नेविले चैंबरलेन को सौंप दिया.

मगर दूसरे विश्वयुद्ध के आरंभ में उनके नेतृत्व पर संकट आया और कुछ सांसदों के विद्रोह के बाद उन्होंने सत्ता त्यागी.

विंस्टन चर्चिल

Image caption कंज़र्वेटिव्स ने ब्रिटेन को विंस्टन चर्चिल जैसा नेता दिया है

फिर विंस्टन चर्चिल प्रधानमंत्री बने जिनकी छवि तो अच्छी रही मगर 1930 के दशक की असफलताओं के कारण मतदाताओं ने युद्ध के बाद पार्टी को नकार दिया और 1945 में पार्टी की करारी हार हुई.

1945 से 1951 तक विपक्ष में बैठी कंज़र्वेटिव पार्टी ने अपनी औद्योगिक और आर्थिक नीतियों पर ध्यान दिया.

चर्चिल ने अधिक उत्साह नहीं दिखाया लेकिन 1951 में पार्टी सत्ता में वापस आ गई और 1964 तक रही.

1964 में डगलस होम की अगुआई में पार्टी चुनाव में उतरी मगर बहुत कम अंतर से हार गई.

अगले साल पहली बार मतदान के द्वारा पार्टी नेता का चुनाव हुआ जिसमें निम्न-मध्यम वर्ग की छवि वाले एडवर्ड हीथ जीते.

और एडवर्ड हीथ ने 1970 में सबको चकित करते हुए जीत हासिल की और प्रधानमंत्री बन बैठे.

मगर उनका चार साल का कार्यकाल अच्छा नहीं साबित हुआ. नीतियाँ वापस ली गईं, मुद्रा की कीमत गिरी और मज़दूर संगठन अनियंत्रित रहे.

नतीजा एडवर्ड हीथ का नेतृत्व गया और 1974 में हुए दो चुनावों में पराजय के बाद अगले साल पार्टी प्रमुख के लिए चुनाव हुआ जिसमें मार्गरेट थैचर ने हीथ को पराजित कर पार्टी का नेतृत्व संभाला.

थैचर युग

1975 से 1979 तक नई नेता ने पार्टी में जान फूँकी, मुक्त बाज़ार पर बल दिया, सरकारी हस्तक्षेप नहीं करने का वादा किया और व्यक्तिगत उद्यम को बढ़ावा दिया.

गिरती आर्थिक स्थिति ट्रेड यूनियनों के बढ़ते प्रभाव से चिंतित लोगों ने टोरियों को हाथों-हाथ लिया और मार्गरेट थैचर ने 1979, 1983 और 1987 में पार्टी को तीन बार जीत दिलाई.

मगर आर्थिक मंदी, चुनाव टैक्स को समर्थन और कई अंदरूनी मतभेदों के बीच 1990 में मार्गरेट थैचर को पार्टी प्रमुख का पद छोड़ना पड़ा.

फिर कमान गई जॉन मेजर के हाथ में जिन्हें टूटती हुई पार्टी को एक करनेवाला सबसे योग्य व्यक्ति समझा गया.

1992 के चुनाव में बहुत कम अंतर से ही सही, पार्टी जीती और मेजर प्रधानमंत्री बने.

अंतिम प्रधानमंत्री

1992 से 1997 तक का जॉन मेजर का काल कंज़र्वेटिव पार्टी के लिए बेहद बुरा रहा.

1 मई 1997 को पार्टी की करारी हार हुई और केवल 166 सदस्य सांसद बन सके.

पार्टी का नेतृत्व फिर विलियम हेग के हाथ में गया मगर 2001 के चुनाव में वे भी कुछ चमत्कार नहीं दिखा सके.

नतीजे आने के अगले दिन हेग ने पद छोड़ दिया और फिर केनेथ क्लार्क को हराकर इयन डंकन स्मिथ पार्टी नेता चुने गए.

लेकिन अगले दो वर्षों में भी पार्टी की लोकप्रियता में कोई बदलाव ना होता देख 2003 में कंज़र्वेटिव पार्टी के सांसदों ने मतदान किया जिसमें इयन डंकन स्मिथ हार गए और उनको नेतृत्व छोड़ना पड़ा.

इसके बाद माइकल हॉवर्ड प्रमुख पद के लिए अकेले उम्मीदवार के तौर पर निर्वाचित हुए लेकिन उनकी अगुआई में पार्टी 2005 के चुनाव में लेबर को चुनौती नहीं दे पाई.

उसके बाद पार्टी की कमान आई युवा नेता डेविड कैमरून के हाथों में. उन्होंने पार्टी से 'रूढ़ीवादी' की छाप हटाने और उस पर 'आधुनिक' का बिल्ला लगाने के लिए पार्टी की परंपरागत नीतियों में कई बदलाव किए.

कैमरून को 1997 से ही सत्तारूढ़ लेबर पार्टी से जनता के एक बड़े वर्ग के मोहभंग का भी फ़ायदा मिला और पिछले दो वर्षों से जनमत सर्वेक्षणों में टोरी पार्टी सबसे आगे हैं. हाल के महीनों में उसकी बढ़त कम हुई है लेकिन लेबर और नए सिरे से लोकप्रिय हुई लिबरल डेमोक्रेट्स पार्टी अब भी कंज़र्वेटिव्स को छू नहीं पाई हैं.

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