ग्रीस वित्तीय संकट में नया मोड़, भारत पर भी असर

Image caption बाज़ार और निवेशक ग्रीस की स्थिति से सहमे हुए हैं.

ग्रीस सरकार को मिलने वाले कर्ज़ की ब्याज दर में और बढ़ोतरी ने वहां के वित्तीय संकट में एक नया मोड़ ला दिया है. भारतीय बाज़ारों पर भी इस वित्तीय संकट का असर नज़र आया.

ग्रीस की सरकार को दो सालों के लिए लिए जानेवाले कर्ज़ पर अब 20 प्रतिशत ब्याज देना होगा. मंगलवार तक ये दर 14 प्रतिशत की थी.

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता का कहना है कि नया दर काफ़ी ज़्यादा है और ये ग्रीस की डांवाडोल अर्थव्यवस्था को लेकर बाज़ार में व्यापत चिंताओं को दर्शा रहा है.

ग्रीस संकट का सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या वहां की सरकार पूरा कर्ज़ चुका पाएगी और क्या समय पर चुका पाएगी.

ग्रीस को राहत देने के लिए विश्व मुद्रा कोष और यूरोपीय संघ एक पैकेज पर बातचीत कर रहे हैं जिससे ग्रीस को बाज़ार के मुक़ाबले काफ़ी कम ब्याज पर कर्ज़ मिल सकेगा.

इस पैकेज को पास करने के लिए जर्मनी पर ख़ासा दबाव डाला जा रहा है. जर्मनी का योगदान इस पैकेज में सबसे ज़्यादा होगा लेकिन सर्वेक्षणों के अनुसार जर्मनी में ज़्यादातर लोग इसके ख़िलाफ़ हैं.

चांसलर एंगेला मर्केल भी इसपर असमंजस में हैं क्योंकि अगले महीने जर्मनी में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय चुनाव होना है.

इस बीच पुर्तगाल ने भी निवेशकों को भरोसा दिलाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं क्योंकि डर है कि ग्रीस संकट का असर यूरो ज़ोन के दूसरे देशों पर भी हो सकता है.

भारत पर भी असर

मंगलवार को यूरोपीय बाज़ारों में भारी गिरावट आई लेकिन बुधवार को एक ठहराव दिखा.

भारत में भी शेयर बाज़ारों पर असर नज़र आया और मुंबई शेयर सूचकांक 300 अंक नीचे जाकर बंद हुआ.

पांच फ़रवरी के बाद की ये सबसे बड़ी गिरावट है.

विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय बाज़ारों पर यूरोप और अमरीका के बाज़ारों का असर था.

मंगलवार को वहां के बाज़ार इसलिए गिरे थे क्योंकि ग्रीस के सरकारी बॉंडों की रेटिंग करनेवाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने उन्हें ‘कबाड़’ के बराबर बताया था.

राहत पैकेज अहम

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रयू वाकर का कहना है कि अगर ग्रीस के लिए राहत पैकेज पर सहमति नहीं हो पाती है तो डर है कि ग्रीस अपने कर्ज़ नहीं चुका पाए या फिर उनके लिए और समय की मांग करे.

इसका असर दूसरे यूरो देशों पर पड़ेगा जिन्हें अपने कर्ज़ लौटाने हैं और जिन्हें उन कर्ज़ों को चुकाने के लिए बाज़ार से और कर्ज़ लेना है.

इसमें स्पेन और पुर्तगाल शामिल हैं क्योंकि अंदाज़ा है कि दोनों को ही विदेशी निवेशकों की ज़रूरत पड़ेगी नए कर्ज़ों के लिए.

जर्मनी और अन्य देशों के बैंक भी चरमरा सकते हैं क्योंकि ग्रीस ने उनसे भारी कर्ज़ ले रखा है और अगर वो समय से नहीं चुका पाया तो समस्या विकट हो सकती है.

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