मायापुरी मामले पर आईएईए की पेशकश

आईएईए
Image caption अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आईएईए को परमाणु ऊर्जा के नियामक के तौर पर जाना जाता है

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने भारत सरकार से दिल्ली विश्वविद्यालय के ज़रिए कबाड़ियों को असुरक्षित ढंग से रेडियोधर्मी पदार्थों के बेचने की घटना का विवरण मांगा है.

साथ में आईएईए ने भारत को इस संदर्भ में अपनी सहायता की पेशकश भी की है.

बीबीसी संवाददाता सक़लैन इमाम के आईएईए से संपर्क करने पर अधिकारियों ने एक लिखित बयान जारी किया जिसमें कहा गया है कि उनकी संस्था ने नियामानुसार भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग से संपर्क किया और उनसे इस बारे में सारे विवरण मांगे हैं.

आईएईए ने कहा कि इस महीने नौ अप्रैल को संस्था को नई दिल्ली के मायापुरी इलाक़े में रेडियोधर्मी पदार्थ से कुछ लोगों के प्रभावित होने की ख़बर मिली थी और इस सप्ताह संस्था को यह मालूम हुआ कि उनमें से एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई है.

आईएईए ने कहा है कि भारत के परमाणु ऊर्जा संस्था ने इस ख़बर की पुष्टि कर दी है और अवैध तरीक़े से रेडियोधर्मी पदार्थ के लेन-देन का विवरण इस संस्था के आंकड़े इकठ्ठा करने वाले विभाग को सौंप दिया है.

दूसरे स्तर का

इस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कोबाल्ट-60 छोड़ने वाले विभिन्न पदार्थों और उपकरणों का पता लगा लिया गया है और उन्हें सुरक्षित कर लिया गया है.

कोबाल्ट-60 को दूसरी श्रेणी या दूसरे स्तर के विकिरण का स्रोत कहा जाता है जिसे असुरक्षित तरीक़े से प्रयोग करने से कोई व्यक्ति हमेशा के लिए बीमार हो सकता है.

आईएईए का आपातकालीन विभाग इस घटना की पूरी जानकारी हासिल करने में जुटा हुआ है और उसके विशेषज्ञ भारत की अपील पर उसकी मदद करने के लिए तैयार हैं.

इस मामले में और अधिक जानकारी सोमवार तक ही मिल सकेगी क्योंकि आईएईए का दफ़्तर सक़लैन इमाम के संपर्क करने के समय तक बंद हो चुका था.

उधर भारत की परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) ने इस संदर्भ में जांच शुरू कर दी है. उसने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा है कि रेडियोधर्मी कचरा कबाड़ के रूप में कैसे बेचा गया.

विश्वविद्यालय को जवाब देने के लिए दो हफ़्ते का समय दिया गया है. इसके साथ ही एईआरबी ने विश्वविद्यालय से कहा है कि वो फ़िलहाल रेडियोधर्मी प्रयोगों को रोक दे.

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