पत्रकार को सरकार से मिला क्षमादान

  • 3 मई 2010
जयप्रकाश दिसानायगम
Image caption जयप्रकाश दिसानायगम पर आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगाए गए थे.

श्री लंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने 20 साल की जेल की सज़ा पाने वाले एक तमिल पत्रकार को क्षमादान दे दिया है.

जयप्रकाश दिसानायगम को आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप में ये सज़ा दी गई थी

दिसानायगम ने अपने लेखों मे ये आकलन पेश किया था कि तमिल टाइगर विद्रोहियों के साथ संघर्ष का अल्पसंख्यक तमिल बिरादरी पर क्या असर पड़ रहा है

श्रीलंका के विदेशमंत्री का कहना है कि ये संयोग ही है कि विश्व प्रैस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिसायनायगम की सज़ा माफ़ की गई है.

अमरीका और यूरोपीय संघ ने दिसानायगम को सज़ा देने के लिए श्रीलंका सरकार की आलोचना की थी.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पिछले साल विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर जिन पत्रकारों का ज़िक्र किया था उनमें दिसानायगम का नाम भी शामिल था.

ओबामा ने कहा था कि दिसानायगम जैसे लोग ऐसे पत्रकारों की मिसाल हैं जिन्हें अपने काम के लिए जेल जाना पड़ा.

जयप्रकाश दिसानायगम नौर्थ ईस्टर्न मासिक पत्रिका के संपादक थे.

उन्न पर अपने लेखों के ज़िरए जातीय हिंसा भड़काने के आरोप थे.

इसके अलावा ये आरोप भी लगाया गया था कि उन्हें तमिल विद्रोहियों से पैसा मिलता है.

मार्च 2008 में उन्हें गिरफ़्तार किया गया था लेकिन तभी से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार गुट रिहाई की माँग करते रहे हैं.

इसी साल ज़मानत पर बाहर आए दिसानायगम ने अपनी सज़ा के ख़िलाफ़ पिछले साल अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई चल रही थी.

दिसानायगम पर आतंकवाद के लिए पैसा उगाहने और जातीय हिंसा फैलाने की साज़िश रचने के आरोप लगाए गए थे.

पत्रकार दिसानायगम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से ये कहते हुए इंकार किया था कि वे हिंसा में विश्वास नहीं रखते.

पिछले कुछ सालों में श्रीलंका में किसी भी पत्रकार को दी जाने वाली ये सबसे कड़ी सज़ा थी.

मई 2008 में श्री लंका सरकार ने मिल टाइगर विद्रोहियों का सफ़ाया करके सालों से चले आ रहे संघर्ष का को ख़्तम कर दिया था.

एक अनुमान के अनुसार 26 साल चले इस संघर्ष में 70 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

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