चरमपंथियों से नाता रखा तो नागरिकता गई

फ़ैसल शहज़ाद

अमरीका में कुछ सांसदों ने एक ऐसा विधेयक पेश किया है जिसके तहत अगर कोई अमरीकी नागरिक चरमपंथियों से किसी प्रकार का नाता रखता है तो उसकी अमरीकी नागरिकता छीन ली जाएगी.

लेकिन बहुत से लोग इसकी निंदा कर रहे हैं, यहां तक कि व्हाइट हाउस में भी इसका समर्थन नहीं है.

अमरीका के कनेक्टिकट प्रांत के आज़ाद सेनेटर जोसफ़ लीबरमैन ने अमरीकी सेनेट में टेररिस्ट एक्सपेट्रिएशन या चरमपंथी निर्वासन नाम का बिल पेश किया है, जिसके तहत अगर किसी अमरीकी पर यह आरोप हो कि वह चरमपंथियों से जुड़ा है तो उस अमरीकी की नागरिकता छीन ली जाएगी.

सीनेटर लीबरमैन का कहना है कि अमरीका में हाल में कई अमरीकी नागरिकों के कथित तौर पर चरमपंथियों से मिलकर अमरीका पर हमले करने की कोशिश करने और हमले की साज़िश रचने के मामले सामने आने के बाद देश की सुरक्षा के लिए ऐसे कड़े क़ानून ज़रूरी हैं.

अमरीकी विदेश मंत्रालय ने विश्व के कई हिस्सों में सक्रिय लश्करे तैबा, जैशे मोहम्मद, हमास और हिज़बुल्ला जैसी दर्जनों संगठनों को चरमपंथी संगठन क़रार दिया हुआ है.

इस विधेयक के तहत इसी तरह अब अमरीकी नागरिकों के ऐसी संगठनों से संबंध की सूरत में विदेश मंत्रालय ही उनकी नागरिकता ख़त्म करने का फ़ैसला ले सकता है.

सीनेटर लीबरमैन कहते हैं,''इस बिल के तहत अमरीकी विदेश मंत्रालय को यह हक़ हासिल होगा कि अगर कोई अमरीकी नागरिक किसी चरमपंथी संगठन से जुड़ा हो या अमरीका के ख़िलाफ़ युद्व करे तो उसकी अमरीकी नागरिकता ख़त्म कर दी जाए.''

विधेयक का विरोध

पेनसिलवेनिया राज्य के एक डेमोक्रेटिक सांसद जेसन एल्टमाइर ने अमरीकी प्रतिनिधि सभा में भी इसी तरह का बिल पेश किया है.

लेकिन नागरिकता संबंधी इस बिल को बहुत से डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों के सांसदों ने नकार दिया है. यहां तक कि व्हाइट हाउस भी इस विधेयक को समर्थन नहीं दे रहा है.

व्हाइट हाउस प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स कहते हैं,“मैंने प्रशासन के अंदर एक भी व्यक्ति नहीं देखा जोकि इस विधेयक के समर्थन में हो.

यहीं नहीं रिपब्लिकन पार्टी के प्रतिनिधि सभा में नेता जॉन बेनर ने भी इस बिल का विरोध करते हुए कहा है कि यह तो अमरीकी संविधान के ख़िलाफ़ है.

यह बिल ऐसे समय में पेश किया गया है कि जब हफ़्ते भर पहले ही न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर इलाके में एक पाकिस्तानी मूल के अमरीकी फ़ैसल शहज़ाद को एक नाकाम कार बम हमले में गिरफ़्तार कर लिया गया है.

अमरीका में रह रहे पाकिस्तानी मूल के लोग भी इस विधेयक को पेश किए जाने से नाराज़ हैं.

न्यूयॉर्क में रहने वाले खालिद आज़म पेशे से वकील हैं और पाकिस्तानी मूल के अमरीकी नागरिक भी हैं.

इस प्रस्तावित कानून के बारे में वो कहते हैं,“किसी भी व्यक्ति पर आप चरमपंथी होने का इलज़ाम लगा दें और उसकी अमरीकी नागरिकता छीन लें, यह तो बगैर अदालत में मुक़दमा चले किसी को भी चरमपंथी होने का मुजरिम क़रार देना है. ऐसा क़ानून तो इंसाफ़ की तौहीन है.

अमरीका में पहले से ही ऐसे क़ानून मौजूद हैं जो सरकार को उन अमरीकी नागरिकों की नागरिकता ख़त्म करने की इजाज़त देते हैं जिनके ख़िलाफ़ सरकार यह साबित कर सके कि वह अपनी नागरिकता रखना ही नहीं चाहते.

इस नए विधेयक के अमरीकी संसद में पारित होने की संभावना कम है और अगर ऐसा विधेयक पारित भी हो जाए तो इसको अदालत में चुनौती देने की तैयारियाँ चल रही हैं.

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