नाकाम हमले के पीछे तालिबान: अमरीका

टाइम्स स्क्वायर
Image caption अमरीका के अटॉर्नी जनरल के बयान के बाद पाकिस्तान की सरकार पर दबाव बढ़ेगा

अमरीका ने कहा है कि न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में पिछले दिनों नाकाम हमले की कोशिश के पीछे पाकिस्तानी तालेबान हैं.

अमरीका के अटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने यह जानकारी दी है.

हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक इसके कोई संकेत नहीं है कि पाकिस्तान सरकार को इस नाकाम हमले की पहले से जानकारी थी.

अमरीकी टेलीविज़न नेटवर्क एबीसी के एक कार्यक्रम में होल्डर ने कहा, "हमारे पास इसके सबूत हैं कि पाकिस्तानी तालिबान इस नाकाम हमले के पीछे था."

अमरीका ने इस नाकाम हमले के मामले में पाकिस्तानी मूल के एक अमरीका नागरिक फ़ैसल शहज़ाद को गिरफ़्तार भी किया है.

मदद

फ़ैसल की ओर इशारा करते हुए एरिक होल्डर ने कहा, "हम जानते हैं कि तालिबान ने हमले में मदद की और शायद इसके लिए पैसा भी जुटाया. शहज़ाद उनके इशारे पर ही काम कर रहा था."

एक मई को न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर एक कार खड़ी पाई गई थी, जिसमें विस्फोटक रखे हुए थे.

लेकिन एक व्यक्ति की सूझबूझ के कारण पुलिस मौक़े पर पहुँच गई और विस्फोटकों को निष्क्रिय कर दिया गया.

बाद में फ़ैसल शहज़ाद को इस मामले में गिरफ़्तार किया गया.

एक दिन पहले ही अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि भविष्य में अमरीकी धरती पर किसी भी हमले का संबंध पाकिस्तान से पाया जाता है तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने होंगे.

दबाव

Image caption रिपोर्टों के मुताबिक फ़ैसल शहज़ाद को उत्तरी वज़ीरिस्तान क्षेत्र में ट्रेनिंग दी गई थी

इस्लामाबाद में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीका के अटॉर्नी जनरल के बयान के बाद पाकिस्तान की सरकार पर दबाव बढ़ेगा.

अमरीकी अधिकारी चाहते हैं कि पाकिस्तानी सेना अफ़गानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तान के उत्तरी वज़ीरिस्तान क्षेत्र में तालेबान चरमपंथियों के विरुद्ध कार्रवाई करे.

ये इलाका तालिबान का गढ़ है जहाँ अल-कायदा चरमपंथियों को भी शरण मिली हुई है. रिपोर्टों के मुताबिक फ़ैसल शहज़ाद को भी इसी इलाके में ट्रेनिंग दी गई थी.

व्हाइट हाउस का मानना है कि पाकिस्तानी सेना के ज़मीनी हमलों की मदद से इस इलाके से चरमपंथियों का सफ़ाया किया जा सकता है.

उधर पाकिस्तान की सरकार का कहना है कि उसके पास ऐसा करने के लिए संसाधन मौजूद नहीं हैं. लेकिन अमरीका का कहना है कि ऐसा नहीं कर पाने का कारण इच्छाशक्ति की कमी है.

लेकिन टाइम्स स्क्वायर की घटना के बाद पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है. पाकिस्तान के लिए चिंता की बात ये है कि पूर्व में ऐसी सैनिक कार्रवाईयों के बाद तालिबान की ओर से जवाबी हमलों में आम लोगों की जानें गई हैं.

अब जाँचकर्ता ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अमरीका में पाकिस्तानी तालेबान की क्षमता कितनी है और इससे अमरीकी नागरिकों को कितना खतरा है.

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