प्रदर्शनकारियों पर गोली, एक की मौत

प्रदर्शनकारी
Image caption प्रदर्शनकारियों ने दो महीनों से बैंकॉक के कई हिस्सों पर कब्ज़ा कर रखा है और वहाँ कामकाज ठप्प है

बैंकॉक में सेना ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ गोलीबारी शुरु कर दी है.

सेना उस इलाक़े की घेराबंदी के लिए कार्रवाई कर रही है जिसे विद्रोहियों ने अपना ठिकाना बना रखा है.

सेना की इस कार्रवाई में एक प्रदर्शनकारी की मौत हुई है और प्रदर्शनकारियों के सैन्य प्रमुख माने जाने वाले मेजर जनरल खट्टिया सावासडिपोल सहित कई लोग घायल हुए हैं.

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मेजर जनरल सावासडिपोल, जिन्हें से दाएंग के नाम से जाना जाता है, गंभीर रूप से घायल बताए जाते हैं. सरकार ने उन्हें आतंकवादी घोषित कर रखा है.

हिंसा का यह दौर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को हटने के लिए दी गई समय सीमा ख़त्म होने के साथ शुरु हुआ है.

इस बीच राजधानी और आसपास में आपातकाल लागू है और इसे 15 अन्य प्रांतों में लागू करने की घोषणा की गई है.

लाल कमीज़धारी प्रदर्शनकारियों में वामपंथी, लोकतंत्र समर्थक और अपदस्थ प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावाट के समर्थक शामिल हैं.

उनका कहना है कि वर्तमान सरकार अवैध है क्योंकि वो चुनाव जीतकर सत्ता में नहीं आई. लाल कमीज़ धारी प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि संसद भंग की जाए और नए चुनाव कराए जाएं.

बैंकॉक में बीबीसी संवाददाता रैचेल हार्वी का कहना है कि सरकार ने समझौता वार्ताएँ समाप्त कर दी हैं और चुनाव कार्यक्रम को रद्द कर दिया है, इससे वहाँ ख़ूनख़राबे के आसार और बढ़ गए हैं.

से दाएंग घायल

से दाएंग, जिसका अर्थ कमांडर रेड होता है, अपने आपको लालकमीज़धारी प्रदर्शनकारियों का सैन्य रणनीतिकार कहते हैं.

वे प्रदर्शनकारियों में ज़्यादा कट्टरपंथी माने जाते हैं. उन्होंने कई लाल कमीज़धारी प्रदर्शनकारियों पर नरमपंथी होने के आरोप लगाए थे और इसी की वजह से कई लोग उनसे किनारा भी कर गए.

Image caption कहा जा रहा है कि से दाएंग को सिर पर गोली मारी गई है

जिस इलाक़े में वे घायल हुए हैं वहाँ की परिस्थितियाँ अभी स्पष्ट नहीं हुई हैं.

इस बीच न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार ने ख़बर दी है कि से दाएंग को उस समय सिर पर गोली लगी जब वे अख़बार के एक रिपोर्टर को इंटरव्यू दे रहे थे.

लाल कमीज़धारी आंदोलन के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता स्याँ बूनप्रैकॉन्ग ने बीबीसी से कहा है कि वे मानते हैं कि सेना के स्नापर ने उन्हें गोली मारी है.

इससे पहले सेना के प्रवक्ता ने चेतावनी दी थी कि शार्पशूटर महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किए जा रहे हैं.

इस बारे में थाइलैंड सरकार ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसके अलावा दूसरा घातक हमला क़रीब सौ प्रदर्शनकारियों के एक दल पर हुआ जो सुरक्षा बलों की ओर बढ़ रहा था.

प्रदर्शनकारियों के कैंप में स्ट्रीट लाइटें बंद कर दी गई हैं जिससे कि वह पूरा इलाक़ा अंधेरे में समा गया है लेकिन वे विरोध स्वरूप तेज़ आवाज़ में संगीत बजा रहे हैं.

इससे पहले दिन में बीबीसी ने देखा था कि कई ट्रकों में हथियारबंद सैनिकों का दस्ता प्रदर्शनकारियों के इलाक़े की तरफ़ जा रहा था.

प्रदर्शनकारी पिछले दो महीने से बैंकॉक के कई हिस्सों पर कब्ज़ा किए हुए हैं और गत 14 मार्च से उन्होंने बैंकॉक में कामकाज ठप्प कर रखा है.

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