प्रधानमंत्री और प्रदर्शनकारी अपने रुख पर अड़े

बैंकॉक में हिंसा
Image caption तीन दिनों से जारी हिंसा में 22 लोगों की मौत हो चुकी है

थाइलैंड में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सैन्य प्रयोग की प्रधानमंत्री की चेतावनी की अवहेलना करते हुए अपना विरोध जारी रखा है.

अब प्रदर्शनकारी सैन्य कार्रवाई को देखते हुए बैंकाक के कई और हिस्सों में फैल रहे हैं.

राजधानी के एक इलाक़े में सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी मोबाइल स्टेजों पर जमा हो गए और उन्होंने लोगों से विरोध प्रदर्शनों में बढ चढ़कर हिस्सा लेने की अपील भी की.

थाईलैंड में सैनिकों और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच हुए संघर्ष में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है. प्रदर्शनकारियों के एक नेता का कहना था कि थाईलैंड अब ‘गृह युद्ध’ की स्थिति में पहुंच चुका है.

सैनिकों और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष उस समय और तेज़ हो गया जब सेना प्रदर्शनकारियों के शिविर को अलग थलग करने की कोशिश कर रही थी.

प्रधानमंत्री अभिसीत विजयजीवा ने कहा है कि वो पूरे बैंकाक में कर्फ्यू लगाने के बारे में सोच रहे हैं. बैंकाक में पहले ही स्कूल की नए सत्रों को खुलने से फिलहाल रोक दिया गया है.

प्रधानमंत्री अभिसीत के ख़िलाफ़ पिछले कुछ दिनों से हज़ारों की संख्या में लोग बैंकाक की सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं. लाल कमीज़ में ये प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े और नए चुनावों की मांग कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री का भाषण

प्रधानमंत्री अभिसीत विजयजीवा ने शनिवार को सरकारी टेलीविज़न पर अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि सरकार पीछे नहीं हटेगी और प्रदर्शनकारियों को भगा कर ही दम लेगी.

उन्होंने कहा कि बल प्रयोग के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है.

उन्होंने सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा, "सरकार को आगे बढ़ कर ये कार्रवाई करनी ही पड़ेगी. हम पीछे नहीं हट सकते क्यों कि हम देश हित में ये क़दम उठा रहे हैं."

उनके अनुसार देश क़ानून का शासन बनाए रखने और स्थिति को सामान्य बनाने के उद्देश्य से ही सेना की कार्रवाई की जा रही है.

सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के साथ झड़पों में सेना ने शनिवार को भी फायरिंग की थी. प्रदर्शनकारियों ने भी ग्रेनेड हमले किए हैं.

गुरुवार को लाल कमीज़धारी प्रदर्शनकारियों के एक शीर्ष नेता को गोली लगने के बाद हिंसा का ताज़ा दौर शुरू हुआ है. तीन दिनों की हिंसा में कम से कम 24 लोग मारे गए हैं, जबकि सैंकड़ो अन्य घायल हो गए हैं.

सेना ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार भी किया है.

पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन चिनावाट समर्थक प्रदर्शनकारी नया चुनाव चाहते हैं.

सेना का घेरा

बैंकॉक में थाई सेना ने लाल कमीज़धारी प्रदर्शनकारियों के सबसे बड़े शिविर को घेर लिया है. इस कार्रवाई के पीछे सेना का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को शिविर में ही घेर कर रखना और उनकी खाद्य सामग्री की सप्लाई को बंद करना है.

बैंकॉक के उन इलाकों में फायरिंग और धमाकों की आवाजें सुनी जा रही हैं जहां सरकार विरोधी लाल कमीज़धारी प्रदर्शनकारी अपने शिविर लगाए हुए हैं. इन इलाकों में जलती टायरों का धुआँ भी फैला हुआ है.

सेना ने प्रदर्शनकारियों की उपस्थिति वाले एक इलाक़े को 'लाइव फायर ज़ोन' घोषित कर दिया है.

इस बीच बैंकॉक स्थित अमरीकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों को सलाह दी है कि संभव हो तो वे अपने परिजनों को राजधानी से बाहर ले जाएँ.

अमरीका ने अपने नागरिकों को भी इस समय बैंकॉक नहीं आने की सलाह दी है.

बैंकॉक स्थित अमरीकी दूतावास के प्रवक्ता माइकल टर्नर ने कहा," हम अमरीकी नागरिकों से अनुरोध करते हैं कि वे बैंकॉक की यात्रा न करें और थाईलैंड के अन्य भागों में भी ग़ैरज़रूरी यात्रा करने से बचें. हम स्थिति पर बराबर नज़र रखे हुए हैं, और अपने नागरिकों को लगातार संदेशों और चेतावनी के ज़रिए आगाह कर रहे हैं."

इस बीच सयुंक्तराष्ट्र के महासचिव बान की मून ने इस मसले को सुलझाने के लिए वार्तालाप दोबारा शुरु करने की अपील की है. लेकिन प्रधानमंत्री विजयजीवा ने शनिवार के टेलीविज़न संदेश में इससे इनकार किया है.

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