गोवा बम धमाके में 11 पर अभियोग

Image caption राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गोवा बम धमाके के संबंध में 11 लोगों पर अभियोग लगाए

भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 2009 में गोवा में हुए धमाके के संबंध में 11 लोगों पर अभियोग लगाए हैं.

सभी अभियुक्त दक्षिणपंथी हिंदू संगठन ‘सनातन संस्था’ के सदस्य हैं. इनमें से धनंजय अष्टेकर, दिलीप मंगांवकर, विनायक पाटिल और विनय तालेकर पहले से पुलिस की हिरासत में हैं जबकि पांच अन्य फ़रार हैं.

चार हज़ार पृष्ठों के अभियोग पत्र में इन लोगों पर 16 अक्टूबर 2009 को दीवाली की पूर्वसंध्या को मदगांव में सिलसिलेवार बम धमाकों का षड़यंत्र करने के आरोप लगाए गए हैं.

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हमलों के इस षड़यंत्र में ‘सनातन संस्था’ की क्या भूमिका थी.

पुलिस को इस संस्था पर शक तब हुआ जब उसे पता चला कि जिस स्कूटर पर बम लगाया गया था वह इस संस्था के एक सदस्य का था.

बम धमाका

यह धमाका तब हुआ जब दीवाली से एक दिन पहले 'नरकासुर' का पुतला जलाया जा रहा था. इस धमाके में तीन गाड़ियाँ जल कर राख हो गई.

पुलिस का कहना है कि मालगोंडा पाटिल और योगेश नाइक एक मोटर साइकिल पर बम लगाने वाले थे लेकिन वह अचानक फट पड़ा और दोनों मारे गए.

अभियोग पत्र में मालगोंडा पाटिल और योगेश नाइक के नाम भी शामिल हैं.

इस धमाके के बाद मारगांव की पुलिस ने दो अन्य बमों को निष्क्रिय कर दिया था.

अभियुक्तों पर आपराधिक षड़यंत्र करने और भारत के विरुद्ध लड़ाई छेड़ने के आरोप लगाए गए हैं.

शुरु में मामले की जांच गोवा की पुलिस ने की थी लेकिन जब ऐसे संकेत मिले कि धमाकों के सूत्र महाराष्ट्र, कर्णाटक और गोवा से जुड़ रहे हैं तो इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपने हाथों में ले लिया.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी का गठन 16 दिसम्बर 2008 को आतंकवाद से जुड़े अपराधों की जांच करने के लिए किया गया था.

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