कराची फिर हिंसा की चपेट में

Image caption कराची में जातिगत हिंसा के दौरान बसों को आग लगाई गई.

पाकिस्तान का कराची शहर एक बार फिर हिंसा की चपेट में है जिसमें अब तक 20 लोग मारे जा चुके हैं.

पुलिस सर्जन डॉक्टर हामिद अली ने बीबीसी को बताया कि नौ शव जिन्ना अस्पताल, छह अब्बासी शहीद अस्पताल और तीन सिविल अस्पताल लाए गए हैं.

हिंसा की शुरुआत तब हुई जब शहर के केंद्र में मोटरसाइकिल पर सवार अज्ञात बंदूकधारियों ने एक वाहन पर फ़ायरिंग की.

शहर के विभिन्न इलाक़ों में गोलीबारी का सिलसिला जारी है और पठानों के प्रभाव वालों इलाक़ों शोहराब गोठ, क़ायदाबाद, क़स्बा कॉलोनी और बनारस में स्थिति तनावपूर्ण है.

इन इलाक़ों में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के दस्ते तैनात कर दिये गए हैं.

सिंध सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने की घोषणा की है और कुछ निजी संस्थाएं भी बंद कर दी गई हैं. कराची विश्वद्यालय में चल रही परीक्षा को भी स्थागित कर दिया गया है.

उच्चस्तरीय बैठक

सिंध के मुख्यमंत्री सैयद क़ायम अली शाह ने अर्द्धसैनिक बलों को गिरफ्तार करने का अधिकार दे दिया है लेकिन अभी तक अधिसूचना जारी नहीं की गई है.

शहर की बिगड़ी स्थिति पर विचार विमर्श करने के लिए सिंध के गृहमंत्री ज़ुल्फ़िक़ार मिर्ज़ा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हो रही है.

अधिकतर लोग अज्ञात बंदूकधारियों की फ़ायरिंग में मारे गए. उसके बाद शहर के विभिन्न इलाक़ों में गोलीबारी शुरु हो गई और बाज़ार बंद कर दिए गए.

दलगत झगड़े

उल्लेखनीय है कि कराची में पिछले कई सालों से पठानों और मोहाजिर कहलाए जाने वाले उर्दूभाषियों के बीच कई मामलों पर मतभेद चल रहे हैं.

उर्दूभाषी वे हैं जो विभाजन के समय भारत से पाकिस्तान आए थे. उर्दूभाषियों का नेतृत्व करने वाली पार्टी मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेन्ट या एमक्यूएम और पठानों की अवामी नेशनल पार्टी ने इन हत्याओं के लिए एक दूसरे को ज़िम्मेदार ठहराया है.

हालांकि ये दोनों दल केंद्र और सिंध प्रांत की गठबंधन सरकारों में शामिल हैं और दोनों सरकारों का नेतृत्व पाकिस्तान पीपल्स पार्टी कर रही है.

कराची के पुलिस प्रमुख वसीम अहमद ने बताया कि मरने वालों में कम से कम एक सदस्य एमक्यूएम का और चार सदस्य अवामी नेशनल पार्टी के हैं.

सिंध में अवामी नेशनल पार्टी के प्रमुख शाही सईद ने कहा, "बुधवार को हुई इन हत्याओं का उद्देश्य कराची से पश्तूनों को निकालना है".

जबकि एमक्यूएम का कहना है कि ये हत्याएं अलग हज़ारा प्रांत की मांग को लेकर अवामी नेशनल पार्टी के भीतर चल रही लड़ाई के कारण हुई हैं.

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