थाईलैंड में सरकार विरोधी जनरल की मृत्यु

थाइलैंड
Image caption प्रदर्शनकारियों को सेना ने पूरी तरह से घेर रखा है.

थाईलैंड में अधिकारियों का कहना है कि गुरुवार को हुई गोलीबारी में घायल हुए प्रदर्शनकारियों के समर्थक जनरल खट्टिया स्वासदिपोल की मृत्यु हो गई है.

अस्पताल ने यह घोषणा ऐसे समय में की है थाईलैंड के अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता की प्रदर्शनकारियों की पेशकश को ठुकरा दिया है जिसके बाद सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष तेज़ हो गया है.

राजधानी बैंकाक के कई इलाक़ों से लगातार गोलाबारी और धमाकों की आवाज़ें आ रही हैं.

गुरुवार को शुरु हुई इस हिंसा में अब तक 36 लोगों की मौत हो गई है. गुरुवार को जनरल खट्टिया को उस समय गोली लगी थी जब वो प्रदर्शनाकारियों के साथ खड़े होकर न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार से बातचीत कर रहे थे.

उन्हें गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती किया गया था और लग रहा था कि उनकी जान बच जाएगी. खट्टिया को गोली लगने के बाद प्रदर्शनकारी काफी उग्र हो गए थे. उन्होंने आरोप लगाया है कि खट्टियो को सेना के बंदूकधारियों ने गोली मारी है.

बैंकाक के राचाप्रासोंग इलाक़े में प्रदर्शनकारियों ने जनरल खट्टिया की मौत पर एक मिनट का मौन रखा और इस दौरान कई लोगों की आंखों में आंसू थे.

अधिकारियों का कहना है कि देर रात शुरु हुए संघर्ष में एक सैनिक की भी मौत हो गई है. अब बड़े होटलों के पास भी गोलीबारी हो रही है जिसके बाद कई होटल खाली हो रहे हैं.

रायटर्स के अनुसार एक बड़े होटल दुसित थानी को पूरी तरह खाली करा लिया गया है.

संघर्ष में अबतक 200 लोग घायल हुए हैं. ये प्रदर्शन मार्च के महीने से ही चल रहे हैं जिसमें अब तक 60 लोगों की मौत हो चुकी है 1600 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

हालांकि प्रदर्शन ने इसी महीने काफ़ी उग्र रुप अख्तियार किया है. कई स्थानों पर सेना के शार्पशूटर प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोली चला रहे हैं.

सरकारी प्रवक्ता पनितन वत्तानायागरोन का कहना है कि सेना आम लोगों को परेशान नहीं कर रही है बल्कि प्रदर्शनकारियों में शामिल ‘हथियारबंद आतंकवादियों’ को निशाना बना रही है.

थाईलैंड में ये प्रदर्शनकारी लाल कमीज़धारी कहे जाते हैं क्योंकि उन्होंने आंदोलन के लिए यही रंग चुना है. प्रदर्शनकारी सेना पर पत्थर, पेट्रोल बम और पटाखे फेंकते हैं और कई बार चौकियों में आग लगा देते हैं.

कुछ प्रदर्शनकारियों के हथियारबंद होने की भी ख़बरें हैं.

गुरुवार को शुरु हुई हिंसा के बाद प्रदर्शनकारियों ने रविवार को कहा था कि अगर सेना को प्रदर्शकारियों के प्रभाव वाले स्थानों से पीछे हटाया जाए तो वो संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता के साथ बातचीत को तैयार हैं.

सरकारी प्रवक्ता ने इस प्रस्ताव को ख़ारिज़ करते हुए कहा कि किसी बाहरी मदद की ज़रुरत नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘‘ हम संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता की मांग को ख़ारिज़ करते हैं. थाई सरकार किसी को भी अपने अंदरुनी मामलों में दखल नहीं देने देगी.’’

प्रदर्शन अब देश के अन्य हिस्सों में भी फैल रहा है और देश के 22 प्रांतों में आपातकाल लगा दिया गया है. हालांकि ये सारे प्रांत देश के उत्तरी हिस्से में हैं.

सरकार ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी है और कहा है कि किसी भी प्रदर्शनकारी को सोमवार दोपहर तक सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा.

बैंकाक में बीबीसी संवाददाता क्रिस हॉग का कहना है कि ये अभी स्पष्ट नहीं है कि ये समयसीमा ख़त्म होने के बाद सरकार कैसा रवैय्या अपनाएगी.

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