'अफ़ग़ानिस्तान पर एक मत'

Image caption एंड्रयू मिशेल, जनरल स्टेनली मैक्क्रिस्टल, विलियम हेग और लियम हेग काबुल में मिले

अफ़ग़ानिस्तान दौरे पर आए ब्रिटेन के विभिन्न मंत्रियों ने वहाँ ब्रितानी भूमिका पर मतभेदों की रिपोर्टों को खारिज किया है.

विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा है कि ब्रिटेन अफ़ग़ानिस्तान का साथ देगा और उन्होंने ब्रितानी सेना की वापसी की तारीख़ तय करने से मना कर दिया.

लेकिन दौरे से पहले रक्षा मंत्री लियम फ़ॉक्स ने एक इंटरव्यू में कहा था वे चाहते हैं कि ब्रितानी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान से जल्द से जल्द वापस लौट आएँ. उन्होंने टाइम्स अख़बार में कहा था कि ब्रितानी सैनिकों का काम अफ़ग़ान समाज में चीज़ों को ठीक-ठाक करना नहीं है.

उनका कहना था, “ब्रिटेन को अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्र-निर्माण के काम से ध्यान हटाकर अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर ध्यान देना चाहिए.”

लियम फ़ॉक्स ने कहा था, “अब ध्यान राष्ट्रीय सुरक्षा पर है. हम कोई वैश्विक पुलिस का काम नहीं कर रहे. हम 13वीं सदी के समाज वाले देश में लोगों को सीखने-सीखाने का काम करने नहीं आए हैं. हम वहाँ इसलिए हैं ताकि ब्रितानी लोगों के हितों का ध्यान रखा जा सके.”

लेकिन अफ़ग़ान नेताओं के साथ मुलाकात के बाद दोनों मंत्रियों ने ज़ोर देकर कहा कि वे अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निमार्ण के प्रति वचनबद्ध हैं.

काबुल में बीबीसी संवाददाता के मार्क डुमेट ने कहा कि रक्षा मंत्री लियम फ़ॉक्स ने बहुत कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है जिससे संकेत मिलते हैं कि नई ब्रितानी सरकार अफ़ग़ानिस्तान में नई नीति पर विचार कर रही है.

हालांकि काबुल में मुलाक़ात के बाद अंतरराष्ट्रीय विकास सचिव एंड्रयू मिशेल और रक्षा मंत्री ने पत्रकार वार्ता में एक जैसा रुख़ अपनाया.

लियम फ़ॉक्स ने कहा कि अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने ख़ुद कहा था कि तालिबाने के बाद का अफ़ग़ानिस्तान 13वीं या 14वीं सदी के किसी देश जैसा लगता है.

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