उत्तर कोरिया पर अहम बैठक

वेन जियाबाओ और ली म्यंग-बाक
Image caption वेन जियाबाओ और ली म्यंग-बाक के बीच चर्चा का एक दौर हो चुका है

चीन, जापान और दक्षिण कोरिया एक उच्च स्तरीय बैठक कर रहे हैं जिसमें उत्तर कोरिया की वजह से कोरिया प्रायद्वीप में उपजे तनाव पर चर्चा होगी.

सियोल में होने वाली इस बैठक से पहले चीन पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ कूटनीतिक क़दम उठाए.

यह तनाव गत मार्च महीने में दक्षिण कोरिया के एक युद्धपोत को डुबोने की घटना के बाद पैदा हुआ है.

पिछले हफ़्ते एक अंतरराष्ट्रीय जाँच दल ने पाया था कि युद्धपोत डुबोने के लिए उत्तर कोरिया ज़िम्मेदार है. हालांकि उत्तर कोरिया इन आरोपों का ज़ोरदार ढंग से खंडन करता रहा है.

जापान और दक्षिण कोरिया तो उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की घोषणा कर चुके हैं लेकिन चीन ने अब तक उत्तर कोरिया की निंदा नहीं की है. चीन का कहना है कि वह इन सबूतों की पुष्टि करना चाहता है कि दक्षिण कोरियाई युद्ध पोत को उत्तर कोरिया ने टारपीडो किया था.

कार्रवाई का दबाव

Image caption चीन अभी इन नतीजों से संतुष्ट नहीं है कि उत्तर कोरिया ने युद्धपोत पर हमला किया था

इस बीच दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया से सारे व्यावसायिक और वाणिज्यिक संबंध ख़त्म करने की घोषणा की है और अब वह दबाव बना रहा है कि उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी कार्रवाई करे.

ऐसी किसी कार्रवाई की सहमति बनाने के लिए चीन का समर्थन ज़रुरी होगा.

इस बीच चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली म्यंक-बाक से द्विपक्षीय वार्ता की है.

वेन जियाबाओ ने शुक्रवार को कहा था कि जो भी दक्षिण कोरिया के युद्धपोत को डुबोने के लिए ज़िम्मेदार है, उसे बचाने की कोशिश नहीं करेगा.

लेकिन चीन ने अब तक किसी तरह का कोई क़दम उठाने की घोषणा नहीं की है.

तीनों देश के नेता दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप पर दो दिन तक चर्चा करेंगे.

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच पिछले बरसों में संबंधों में कुछ सुधार आया था लेकिन चूंकि दोनों देशों के बीच 1953 में हुआ युद्ध बिना किसी शांति समझौते के ख़त्म हो गया था इसलिए तकनीकी तौर पर दोनों देश अभी भी युद्ध में हैं.

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