परमाणु हथियार मुक्त बने मध्य पूर्व: संयुक्त राष्ट्र

परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देश मध्य पूर्व को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने की ओर काम करने के लिए सहमत हो गए हैं.

न्यूयॉर्क में हुई बैठक में इन देशों ने कहा है कि ऐसा ज़ोन बनाने के लिए 2012 में सम्मेलन बुलाया जाना चाहिए जिसमें मध्य पूर्व के देश हिस्सा लें.

साथ ही ये भी कहा गया है कि इसराइल परमाणु असप्रसार संधि(एनपीटी) पर हस्ताक्षर करे.

हालांकि अमरीका का कहना है कि इसराइल के बारे में शामिल की गई ये बात इसराइल को 2012 के सम्मेलन में हिस्सा लेने से हतोत्साहित कर सकती है.

बीबीसी संवादादता बारब्रा प्लेट का कहना है कि परमाणु हथियार वाले देशों और परमाणु हथियार न रखने वाले देशों के बीच काफ़ी मतभेद हैं.

एक महीने तक चले सम्मेलन के बाद 28 पेज के घोषणापत्र पर सहमति बन सकी.

इस घोषणापत्र में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव 2012 में मध्य पूर्व देशों का सम्मेलन करवाएँ ताकि ‘परमाणु और विनाशकारी हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाया जा सके.’

118 नैम देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए मिस्र ने इस घोषणा का स्वागत किया है और कहा है कि एनपीटी के लक्ष्यों को हासिल करने की ओर ये अहम क़दम है.

अरब देशों और इसराइल के सहयोगियों को अंतिम घोषणापत्र पर सहमति बनाने के लिए काफ़ी मेहनत करनी पड़ी.

जिन मुद्दों को लेकर मतभेद थे उनमें इसराइल का मसला भी शामिल था. इसराइल ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. माना जाता है कि इसराइल के पास परमाणु हथियार हैं हालांकि इसराइल ने ये बात कभी स्वीकार नहीं की है.

संवाददाताओं का कहना है कि अरब देश चाहते हैं कि इसराइल पर इस बात के लिए दबाव डाला जाए कि वो अपने अघोषित परमाणु हथियार छोड़ दे.

बातचीत के दौरान बाद में ईरान ने ये माँग रखी कि परमाणु शक्ति वाले पाँचों देशों एक समयसीमा तय करें कि वो कब तक परमाणु हथियार मुक्त देश बनेंगे.

मतभेद

अंतिम दस्तावेज़ में किसी समयसीमा की बात नहीं की गई है लेकिन पाँचों देशों ने कहा है कि अपने परमाणु हथियार कम करने के लिए वो प्रयास तेज़ करेंगे और 2014 में इस पर रिपोर्ट देंगे.

अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान से भी बार-बार सवाल पूछे गए. पश्चिमी देशों को लगता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है जबकि ईरान का कहना है कि वो केवल अपनी ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करना चाहता है.

ईरान और उत्तर कोरिया के संदिग्ध परमाणु कार्यक्रमों की निगरानी कैसे की जाए इसे लेकर एनपीटी सदस्यों में मतभेद हैं.

चार ऐसे देश हैं जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए पर उनके पास घोषित या संदिग्ध तौर पर परमाणु हथियार हैं. इनमें भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इसराइल शामिल है.

एनपीटी के नए घोषणापत्र के दायरे में ये देश नहीं आते हैं.

हर पांच साल बाद एनपीटी सम्मेलन होता है. 2005 में हुए सम्मेलन में किसी घोषणापत्र पर सहमति नहीं हो पाई थी.

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