हमले पर संयुक्त राष्ट्र की आपात बैठक

Image caption इसराइल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वो इन जहाज़ों को गज़ा की सीमा में प्रवेश नहीं करने देगा.

फ़लस्तीन के लिए मदद ले जा रहे जहाज़ों पर हुए इसराइली हमले पर विचार विमर्श के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक आपात बैठक बुलाई है.

इस हमले में जहाज़ पर सवार कार्यकर्ताओं में से कम से कम नौ मारे गए हैं.

तुर्की इस बैठक की अगवाई कर रहा है और वहां मौजूद उनके विदेश मंत्री सुरक्षा परिषद से एक कड़े बयान के लिए दबाव डाल रहे हैं.

राजनयिकों का कहना है कि आरंभिक दस्तावेज़ में इसराइली हमले की कड़ी निंदा की गई है, जहाज़ों को फ़ौरन छोड़ने की मांग की गई है और एक अंतरराष्ट्रीय जांच की भी मांग की गई है.

लेकिन इस पर आख़िरी फ़ैसला तभी होगा जब सुरक्षा परिषद् के सदस्य अपना अपना पक्ष रखेंगे.

बहुत कुछ अमरीका पर भी निर्भर करेगा.

फ़िलहाल अमरीका ने मारे गए लोगों के प्रति अफ़सोस प्रकट करते हुए कहा है कि ये घटना किन परिस्थितिओं में हुई इसकी पूरी जांच हो.

वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी इस घटना की पूरी जांच की मांग की है.

इसराइल का कहना है कि उसके सैनिकों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई लेकिन फ़लस्तीन समर्थक कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी तरफ़ से किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई और उनपर बिना वजह गोली चलाई गई.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने मारे गए लोगों के प्रति अफ़सोस प्रकट किया है लेकिन साथ ही इसराइली सेना की ओर से उठाए गए कदमों को भरपूर समर्थन दिया है.

नेतनयाहू अपने कनाडा दौरे को अधूरा छोड़ और अमरीका यात्रा को रद्द करके इसराइल लौट रहे हैं.

Image caption इसराइल का कहना है कि उसके सैनिकों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई.

रसद और अन्य मदद सामग्रियों से लदा छह जहाज़ों का ये बेड़ा फ़लस्तीन समर्थक कार्यकर्ताओं के साथ गज़ा में प्रवेश करना चाहता था.

इसराइल ने पहले ही ये स्पष्ट कर दिया था कि वो इस बेड़े को गज़ा की सीमा में प्रवेश नहीं करने देगा.

इसराइली सेना ने समुद्र में गज़ा की सीमा से 40 किलोमीटर की दूरी पर बेड़े के सबसे बड़े जहाज़ में प्रवेश किया था. उसपर कम से कम 500 लोग सवार थे.

इसराइल ने पिछले तीन सालों से गज़ा की आर्थिक नाकेबंदी कर रखी है लेकिन उनका कहना है कि वहां किसी तरह की मुश्किल नहीं है क्योंकि हर हफ़्ते इसराइल वहां 15,000 टन सामग्री पहुंचाता है.

वहीं संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ये मदद वहां की ज़रूरतों से बहुत कम है.

जिन जहाज़ों पर ये सामान लदकर गज़ा आ रहा था उन्हें इसराइली नौसेना ने अपने बंदरगाह पर पहुंचा दिया है.

इसराइल का कहना है कि उसने ये नाकेबंदी अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखकर कर रखी है क्योंकि वो अपने ख़िलाफ़ इस्तेमाल होनेवाले रॉकेटों को गज़ा नहीं पहुंचने देना चाहते.

फ़लस्तीनियों के लिए इस राहत सामग्री का इंतज़ाम तुर्की की एक चैरिटी ने किया था और इस बेड़े पर मौजूद ज़्यादातर कार्यकर्ता तुर्की के नागरिक हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि इस घटना के बाद तुर्की और इसराइल के तनावपूर्ण रिश्ते अब शायद ही कभी सामान्य हो पाएं.

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