नैटो ने बंदियों की रिहाई की मांग की

इसराइली हमले के विरोध में प्रदर्शन भी हुए हैं
Image caption इसराइली हमले के विरोध में प्रदर्शन भी हुए हैं

उत्तर अटलांटिक संधि संगठन नैटो के महासचिव आंदरियस रासमसेन ने ग़ज़ा को सहायता सामग्री ले जाने वाले जहाज़ी बेड़े पर इसराइली हमले की निंदा की है जिसमें अनेक लोग हताहत हुए हैं.

नैटो की एक आपात बैठक के बाद जारी एक वक्तव्य में उन्होंने कहा कि जिन लोगों को इसराइल ने बंदी बना रखा है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए.

उस इसराइली हमले में नौ फ़लस्तीनी समर्थक कार्यकर्ता मारे गए थे. तुर्की के कूटनीतिक सूत्रों ने कहा है कि उनमें कम से कम चार लोग तुर्की के नागरिक थे.

तुर्की के प्रधानमंत्री रजब तैयब अर्दोगान ने कहा था कि इसराइली हमला एक रक्तरंजित नरसंहार है और यह अंतरराष्ट्रीय क़ानून और विश्व शांति पर पर भी एक हमला है. उन्होंने कहा था कि इसराइल को इस कार्रवाई के लिए दंड मिलना चाहिए.

उधर इसराइल ने इस हमले को जायज़ ठहराया है.

वहीं मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने ग़ज़ा को जाने वाला रास्ता खोलने के आदेश दिए हैं.

मिस्र की सरकारी समाचार एजेंसी मेना ने कहा है कि यह रास्ता खोले जाने से ग़ज़ा में मानवीय सहायता भेजने में सुविधा होगी.

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि हुस्नी मुबारक की ये घोषणा किसी नीतिगत बदलाव का हिस्सा है या सिर्फ़ अस्थाई व्यवस्था है.

मिस्र और ग़ज़ा के बीच रफ़ा सीमा चौकी ही एक मात्र ऐसी है जो इसराइल के नियंत्रण में नहीं है.

मिस्र ने ये सीमा तीन साल पहले गज़ा में हमास के सत्ता में आने के बाद बंद कर दी थी.

घटना का विवरण

इस बीच उस जहाज़ी बेड़े पर सवार लोगों ने उस घटनाक्रम पर संदेह जताए हैं जो इसराइल सरकार ने हमले को जायज़ ठहराने के लिए बयान किया है.

फ़लस्तीनी समर्थक एक जर्मन कार्यकर्ता नॉर्मन पाएश का कहना है कि जैसे ही इसराइली सैनिक हैलीकॉप्टर से जहाज़ पर उतरना शुरू हुआ तो उन्होंने सिर्फ़ कुछ डंडे देखे जो जहाज़ पर सवार लोगों ने ताने थे.

जबकि इसराइल का कहना है कि जब उसके सैनिक जहाज़ पर उतरे तो उन पर चाकुओं, मोटे डंडों और अन्य हथियारों से हमला किया गया था और इसराइली सैनिकों ने सिर्फ़ आत्मरक्षा में गोलियाँ चलाई थीं.

इसराइल के इस हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक निंदा हुई है और संयुक्त राष्ट्र ने तुरंत जाँच की माँग की है.

काफ़ी लंबी बहस के बाद संयुक्त राष्ट्र ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें राहत सामग्री लेकर गज़ा जाने की कोशिश कर रहे जहाज़ों पर इसराइली हमले की जाँच की बात कही गई है.

संयुक्त राष्ट्र में मौजूद बीबीसी संवाददाता बार्बरा प्लेट का कहना है कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को लेकर तुर्की और अमरीका के बीच काफ़ी देर तक तकरार हुई.

तुर्की इसराइल की कड़ी आलोचना के मामले में किसी तरह की ढील के लिए तैयार नहीं था जबकि अमरीका इसराइल के ख़िलाफ़ भाषा को नरम रखने की हिमायत कर रहा था.

आख़िरकार जो प्रस्ताव पारित हुआ उसमें निष्पक्ष, त्वरित और पारदर्शी जाँच की बात कही गई.

सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष, मैक्सिको के राजदूत क्लाउड हेलर ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में इसराइल की सैनिक कार्रवाई की वजह से लोगों की जो जानें गई हैं उसका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बहुत अफ़सोस है. सुरक्षा परिषद इस हमले की कड़ी निंदा करती है जिसमें दस लोगों की जान गई है और अनेक लोग घायल हुए हैं."

"संयुक्त राष्ट्र माँग करता है कि जहाज़ों और बंदी बनाए गए लोगों को इसराइल फ़ौरन रिहा करे. सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र महासचिव के इस बयान से सहमत है कि इस हमले की जल्द से जल्द अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप पूरी जाँच होनी चाहिए जो स्वतंत्र, निष्पक्ष, विश्वसनीय और पारदर्शी हो."

व्यापक निंदा

अरब देशों के अलावा कई यूरोपीय देशों ने भी संयुक्त राष्ट्र में दबाव बनाया था कि इसराइल के इस हमले की कड़ी जाँच होनी चाहिए. इन्हीं में से एक जर्मनी भी है.

जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्कल ने इसराइली सैनिक कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की, "यह आवश्यक है कि जितनी जल्दी हो सके इस घटना की गहन जाँच हो. मैं चाहती हूँ कि इस घटना की जाँच की निगरानी करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक तैनात किए जाएँ. लोगों की मौत से हमें बहुत सदमा पहुँचा है, मैंने इसराइली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू से बात की है."

"कुछ जर्मन नागरिक भी प्रभावित हुए हैं जिनमें से दो जर्मन सांसद है. इन जर्मन नागरिकों के साथ क्या हो रहा है इसकी तत्काल जानकारी दिए जाने की माँग भी हमने की है."

इसराइली सैनिक कार्रवाई में सबसे अधिक तुर्की के लोग मारे गए हैं इसलिए ज़ाहिर है कि तुर्की ने बहुत नाराज़गी ज़ाहिर की है लेकिन अरब देश भी बहुत क्रुद्ध हैं.

अरब देशों के संगठन अरब लीग के महासचिव अम्र मूसा ने कहा, "हम इस दुखद त्रासदी के लिए इसराइल की कड़ी आलोचना करते हैं. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इसराइल अंतरराष्ट्रीय नियम कानूनों की अनदेखी कर रहा है, वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भी परवाह नहीं कर रहा है. जो कानून का पालन नहीं कर रहा हो वह तो कुछ भी कर सकता है. यह बहुत गंभीर स्थिति है."

"ताज़ा घटना यही दिखाती है कि इसराइल की किसी शांति प्रक्रिया में दिलचस्पी नहीं है और वह अरबों के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहता है. यह गंभीर स्थिति है जिसकी चर्चा अरब लीग में और दूसरे मंचों पर होनी चाहिए."

इसराइल की इस कार्रवाई के ख़िलाफ़ दुनिया भर में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, अमरीका में न्यूयॉर्क में टाइम्स स्केवयर पर जमा हुए प्रदर्शनकारियों ने इसराइल के ख़िलाफ़ और फ़लस्तीन के समर्थन में नारे लगाए.

सोमवार को लंदन में प्रधानमंत्री के आवास टेन डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर प्रदर्शन हुआ था जबकि तुर्की सहित कई अरब देशों से प्रदर्शन के समाचार मिल रहे हैं.

इसराइल ने राहत सामग्री से लदे जहाज़ों के बेड़े से छह सौ लोगों को हिरासत में लिया है जिन्हें इसराइली तटीय नगर अशदाद में रखा गया है. इसमें दुनिया भर के कई देशों के स्वयंसेवी सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार भी शामिल हैं.

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