गज़ा जा रहा जहाज़ इसराइल ले जाया गया

रेचल कोरी जहाज़
Image caption इस घटना को इसराइल और हमास दोनों ने अपनी-अपनी जीत बताया है

इसराइल की सेना का कहना है कि ग़ज़ा के फ़लस्तीनियों के लिए राहत सामग्री ला रहे रहे आयरलैंड के जहाज़ रेचल कोरी को इसराइल के अशदोद बंदरगाह ले जाया गया है.

इसराइली सेना का कहना है कि गज़ा तट से 30 किलोमीटर दूर समुद्र में इस जहाज़ पर नियंत्रण करते समय उसके सैनिकों को किसी प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा.

इसराइल की एक प्रवक्ता मिरि आइज़िन ने बताया कि जहाज़ पर शांतिपूर्ण नियंत्रण के बाद उसे अशदोद बंदरगाह रवाना किया गया.

उनका कहना था, “पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण और अहिंसक रही. इसमें जहाज़ पर सवार लोगों का भी सहयोग रहा.”

उल्लेखनीय है कि गज़ा के लिए रवाना होने से पहले उस पर सवार आयरलैंड और मलेशिया के कार्यकर्ताओं ने कहा था कि यदि इसराइली सेना ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे कोई प्रतिरोध नहीं करेंगे.

इसराइली सेना का कहना है कि अशदोद बंदरगाह ले जाकर कार्यकर्ताओं से पूछताछ और जहाज़ में भरे सामान की जांच की जाएगी.

ग़ौरतलब है कि इस सप्ताह इसराइल ने ग़ज़ा के लिए राहत सामग्री ला रहे छह जहाज़ों के बेड़े पर हमला कर कम से कम नौ कार्यकर्ताओं को मार दिया था.

ये जहाज़ ग़ज़ा पर लागू इसराइली नाक़ेबंदी तोड़ कर ग़ज़ा मे राहत सामग्री ले जाना चाहते थे.

उधर फ़्री ग़ज़ा मूवमेंट की सहसंयोजिका मैरी ह्यूज़ ने बीबीसी को बताया कि इसराइल के ताज़ा क़दम से वे हैरान रह गईं, “वे (इसराइली) एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में घुसे और ग़ज़ा जाने के लिए निकले लोगों को ज़बर्दस्ती इसराइल जाने पर मजबूर किया.”

मैरी ह्यूज़ ने बताया कि ग़ज़ा के लिए राहत सामग्री की और खेपें भी भेजी जाएंगी.

उनका कहना था कि “जब तक हम गज़ा की नाक़ेबंदी तोड़ नहीं लेते, तब तक ये अभियान जारी रखेंगे.”

इसराइली पक्ष

इसराइल सरकार के प्रवक्ता मार्क रेगेव ने कहा है कि आयरलैंड सरकार के साथ इसराइल की सहमति हो चुकी थी कि सहायता सामग्री सीधे अशदोद बंदरगाह ले जाई जाएगी और वहां से जांच के बाद गज़ा पहुँचा दी जाएगी.

इसरायल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के हवाले से प्रधानमंत्री कार्यालय ने रेचल कोरी पर नियंत्रण को सफल अभियान बताया.

"आज हमने जहाज़ पर ऐसे शांति कार्यकर्ता देखे, जिनके साथ हमारे मतभेद हैं लेकिन हम उनके अलग राय रखने के अधिकार का सम्मान करते हैं. एक उस ज़हाज़ के कार्यकर्ता थे जिन्हें तुर्की के अतिवादियों ने नफ़रत का संदेश देकर भेजा था."

हमास की राय

लेकिन ग़ज़ा में हमास ने कहा है कि ये घटना उनकी जीत औऱ इसराइल की हार का सबूत है.

हमास के एक प्रवक्ता फ़ौजी बरग़ौम का कहना था इस घटना से ग़ज़ा की नाकेबंदी की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है.

उनका कहना था, "ग़ज़ा में संकट और गंभीर होता चला जा रहा है. हालात बहुत ख़राब हैं. ग़ज़ा से पूरी तरह नाकेबंदी हटाए जाने की ज़रूरत है जिससे हम भी और देशों की तरह आज़ादी का अहसास कर सकें."

उल्लेखनीय है कि इसराइल ने गज़ा पर तीन साल पहले तभी से कड़ी नाक़ेबंदी कर दी थी जब फ़लस्तीनी चरमपंथी गुट हमास ने ग़ज़ा का नियंत्रण संभाला था.

तभी से इसराइल नियंत्रित चेकपोस्ट के ज़रिए वहाँ अत्यंत सीमित मात्रा में ही सहायता सामग्री पहुँच पाती है.

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