'एंडरसन को भारत भेजा जाए'

फ्रैंक पलोन
Image caption पलोन का कहना है कि एंडरसन यूनियन कार्बाइड कंपनी की ग़लतियों के लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार हैं.

न्यू जर्सी राज्य के अमरीकी सांसद फ़्रैंक पलोन ने भोपाल पीड़ितों की हिमायत करते हुए एक कड़ा बयान जारी कर भोपाल त्रासदी के ज़िम्मेदार सभी लोगों को सख़्त सज़ा दिए जाने की मांग की है.

फ़्रैंक पलोन ने खासकर वॉरेन एंडरसन को भारत प्रत्यर्पित करने की मांग की है.

वो कहते हैं, “वॉरेन एंडरसन को अमरीका से भारत प्रत्यर्पित करके वहां उनके गुनाहों की सख्त से सख्त सज़ा दी जानी चाहिए. यूनियन कार्बाइड के प्रमुख की हैसियत से वॉरेन एंडरसन ही कंपनी द्वारा की गई हर कार्रवाई के ज़िम्मेदार थे.”

भारत में भोपाल गैस त्रासदी मामले में 25 साल बाद सात जून को अदालत का फ़ैसला आया था जिसमें आठ दोषियों को दो-दो साल की सज़ा सुनाई गई है और एक-एक लाख का जु्र्माना भी लगाया गया है.

लेकिन त्रासदी के समय यूनियन कार्बाइड के प्रमुख वॉरेन एंडरसन जो पहले ही भारतीय कानून से फ़रार घोषित किए गए हैं, इस फ़ैसले में उनके बारे में कुछ नहीं कहा गया.

वॉरेन एंडरसन, जो करीब 90 साल के होने वाले हैं, न्यू यॉर्क् के मशहूर लॉंग आइलैंड इलाके में कल अपने घर पर मौजूद नहीं थे. मैंने लॉंग आइलैंड में उनके बंगले पहुंचकर उनके दरवाज़े पर काफ़ी देर तक दस्तक दी लेकिन कोई जवाब न मिला. उनके बंगले की क़ीमत करीब 50 लाख डॉलर आंकी जाती है.

कहा जाता है कि वॉरेन एंडरसन का एक घर फ़्लोरिडा में भी है, और वो वहां भी वक्त गुज़ारते हैं.

फ़्रैंक पलोन ने मांग की है कि वॉरेन एंडरसन सहित इस त्रासदी के लिए ज़िम्मेदार उन सभी लोगों को भारत में मुकददमे का सामना करना चाहिए. उनका कहना है इस त्रासदी में होने वाले जान के नुकसान और हज़ारों लोगों को होने वाली तकलीफ़ को देखते हुए ही इनको सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए.

Image caption अमरीका में भी लोगों ने प्रदर्शन कर के भोपाल पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की है

फ़्रैंक पलोन ने भोपाल पीड़ितों की दुहाई देते हुए कहा, “मैं समझता हूं कि इस त्रासदी में न्यायालय द्वारा सिर्फ़ दो साल की सज़ा सुनाया जाना अपमानजनक है. यूनियन कारबाईड के अधिकारियों सहित इस मामले के ज़िम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ़ आपराधिक मुकददमा चलाया जाना चाहिए. ”

अमरीकी सरकार ने उम्मीद जताई है कि इस न्यायिक फ़ैसले के बाद त्रासदी से प्रभावित परिवार इस मामले को बंद कर पाएँगे. अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना था कि अब इस मामले में आगे किसी प्रकार की कार्रवाई की भी कोई आवश्यक्ता नहीं है.

2002 में भारत ने अमरीका से मांग कि थी कि यूनियन कार्बाइड के प्रमुख वॉरेन एंडरसन को भारत प्रत्यर्पित किया जाए लेकिन अमरीका ने दोंनो देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि के बावजूद एंडरसन को भारत के हवाले करने से इंकार कर दिया था.

अदालत के फ़ैसले के बाद एंडरसन को भी कटहरे में लाने पर मचने वाले बवाल के बाद अब भारत सरकार ने गृह मंत्री पी चिदंबरम के नेतृत्व में एक मंत्रियों के ग्रुप का गठन किया है जो इस मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की छानबीन करेगा.

अमरीका में इससे पहले फ़्रैंक पलोन ने डाउ केमिकल्स कंपनी के मुखिया को एक पत्र भी लिखा था जिसमें भोपाल में त्रासदी के इलाके से ज़हरीले पदार्थों की सफ़ाई कराने को कहा गया था. इस पत्र पर 27 अन्य अमरीकी सांसदों ने भी हस्ताक्षर किए थे.

इस पत्र में फ़्रैंक पलोन समेत सभी सांसदो ने यह भी मांग की थी कि डाउ केमिकल्स के अधिकारी भारत जाकर इस मामले में जारी न्यायिक प्रक्रिया में भाग लें.

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