प्रतिबंध कूड़ेदान में फेंकने लायक़: ईरान

अहमदीनेजाद

ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों को ठुकरा दिया है और कहा कि 'ये इस्तेमाल किया हुआ रूमाल है जो कूड़ेदान में फेंकने लायक़ है.'

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रमिन मेहमानपरस्त ने इन नई पाबंदियों को 'ग़लत क़दम' क़रार देते हुए कहा है कि इससे समस्या और जटिल हो जाएगी.

दूसरी ओर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि इन प्रतिबंधों से परमाणु हथियारों के विस्तार को रोकने की दिशा में साफ़ संदेश जाएगा.

हालांकि मतदान के बाद अमरीका ने कहा कि वह अब भी ईरान से रचनात्मक बातचीत करने के लिए तैयार हैं.

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि ईरान के साथ कूटनीति के दरवाज़े अब भी खुले हुए हैं.

चीन ने कहा कि प्रतिबंध ईरान को बातचीत के रास्ते पर वापस लाने के लिए हैं. जबकि रूस ने कहा है कि उसने ईरान के सामने कुछ प्रस्ताव रखे थे जिन पर उसने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की.

प्रतिबंध

इसके पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम की वजह से नए प्रतिबंध लगाए थे. ये ईरान पर चौथे दौर के प्रतिबंध हैं.

अब ईरान पर भारी हथियार जैसे हमला करने वाले हेलिकॉप्टर और मिसाइल ख़रीदने पर पाबंदी लगा दी गई है.

इसके अलावा ईरान पर वित्तीय प्रतिबंध और कठोर कर दिए गए हैं. ईरानी बैंकों से अब लेन देने और कठिन होगा.

साथ ही हथियारों पर लगी रोक और बढ़ जाएगी और साथ ही वहां जाने वाले जहाज़ों की जांच कड़ी कर दी गई है.

उल्लेखनीय है कि तुर्की और ब्राज़ील की आपत्तियों के बावजूद सुरक्षा परिषद ने इन प्रस्तावों को पारित कर दिया था.

ब्राज़ील और तुर्की ने प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ मत दिया जबकि लेबनान ने अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया.

कुल मिलाकर प्रतिबंधों के पक्ष में 12 देशों से मत दिया.

अमरीका और उसके सहयोगी देशों की आशंका है कि ईरान चुपचाप परमाणु हथियारों का निर्माण कर रहा है जबकि ईरान कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

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