मणिपुर बर्मा से आयात करेगा चावल

Image caption राजमार्गों की नाकेबंदी की वजह से मणिपुर में चावल की भारी कमी

मणिपुर जल्दी ही पड़ौसी देश बर्मा से चावल का आयात शुरु करेगा. नागा क़बाइलियों ने मणिपुर जाने वाले राजमार्गों की नाकेबंदी कर रखी है जिसकी वजह से राज्य में चावल की भारी कमी हो गई है.

अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने मणिपुर औद्योगिक विकास निगम से कहा है कि वह बर्मा से कम से कम 10,000 मीट्रिक टन चावल के तुरंत आयात की व्यवस्था करे.

दोनों देशों के व्यापारिक निकायों यानि मणिपुर की राजधानी इम्फ़ाल स्थित नॉर्थईस्ट फ़ैडरेशन ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड और बर्मा के तामु नगर स्थित यूनियन ऑफ़ बॉर्डर ट्रेड चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स के बीच इस आयात को लेकर एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हो चुके हैं.

एनईएफ़टी के उपाध्यक्ष चंद्र किशोर सिंह ने बीबीसी को बताया कि जब से नागा क़बाइलियों ने मणिपुर को बाक़ी देश से जोड़ने वाले दोनों राजमार्गों की नाकेबंदी की है तब से भारत के अन्य राज्यों से चावल मणिपुर नहीं पहुंच पा रहा है.

नागा संगठन मणिपुर के पांच नागा-बहुल ज़िलों की स्वायत्त परिषदों को चलाने वाले क़ानून को ख़त्म करने की मांग कर रहे हैं. उनके अनुसार यह क़ानून परिषदों के वित्तीय अधिकारों में रुकावटें पैदा करता है.

खपत ज़्यादा पैदावार कम

एनईएफ़टी के उपाध्यक्ष चंद्र किशोर सिंह ने कहा, "मणिपुर चावल की सप्लाई में कमी से जूझ रहा है क्योंकि पिछले काफ़ी समय से वह खपत से कम चावल पैदा कर पा रहा है. नागा संगठनों की नाकेबंदी की वजह से स्थितियां और ख़राब हो गई हैं".

मणिपुर में 518,000 मीट्रिक टन चावल की पैदावार होती है जबकि सालाना खपत 621,000 मीट्रिक टन की है.

श्री सिंह ने बताया कि भारत का वाणिज्य मंत्रालय ने बर्मा से 50,000 मीट्रिक टन चावल के आयात को स्वीकृति दे दी है.

बर्मा के सीमा व्यापार विभाग ने इस निर्णय का स्वागत किया है.

म्यामार बॉर्डर ट्रेड के निदेशक यू सॉ ने विन ने बीबीसी को बताया कि इस क़दम से दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार को बढ़ावा मिलेगा.

श्री नी विन ने कहा, "सीमा के आर पार वर्जित व्यापार तो बहुत होता है लेकिन आधिकारिक व्यापार कम है. लेकिन अब उसमें बदलाव आ सकता है".

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