ख़ूनी संडे को मारे गए लोग निर्दोष थे

Image caption इस मामले की पूरी जांच का आदेश टोनी ब्लेयर ने 1998 में दिया.

ब्रिटेन में ब्लडी संडे के नाम से प्रचलित मामले की जांच में पाया गया है कि 40 साल पहले सेना के हाथों मारे गए 13 लोग निर्दोष थे.

ये ब्रिटेन के क़ानूनी इतिहास की सबसे पुरानी और सबसे मंहगी जांच रिपोर्ट है जो मंगलवार को जनता के सामने पेश हुई.

इसकी जांच में बारह साल लगे हैं और तीस करोड़ डॉलर खर्च किए गए हैं.

साल 1972 में लंदनडेरी में एक नागरिक अधिकार आंदोलन के दौरान ब्रितानी सेना ने गोली चला दी थी जिसमें 13 लोग मारे गए थे और 14 घायल हुए थे.

उत्तरी आयरलैंड के आंदोलन का ये सबसे विवादास्पद दिन था और इसे ब्लडी संडे का नाम दिया गया.

इस रिपोर्ट की जानकारी को सार्वजनिक करते हुए प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि मारे गए लोगों में से कोई हथियारबंद नहीं था, उन्हें सेना की तरफ़ से कोई चेतावनी नहीं दी गई थी और कुछ लोग भागने की कोशिश कर रहे थे या दम तोड़ रहे लोगों की मदद कर रहे थे.

प्रधानमंत्री ने सरकार और देश की ओर से मृतकों के परिवारजनों से माफ़ी मांगी.

मृतक के परिवारजनों ने इस जांच रिपोर्ट का स्वागत किया है और कहा है कि उन्हें बरसों से सच का इंतज़ार था.

1972 में ब्रिटेन की सरकार ने दस हफ़्तों में एक जांच रिपोर्ट प्रकाशित कर दी थी जिसमें सेना को क्लीन चिट दिया गया था.

इस घटना के बाद उत्तरी आयरलैंड के लिए संघर्ष कर रही आयरिश रिपबलिक्न आर्मी के सदस्यों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी काफ़ी आलोचना हुई.

लेकिन इन सबके बावजूद 25 साल बाद यानि 1998 में प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने हाई कोर्ट के पूर्व जज लॉर्ड सैविल के नेतृत्व में इसकी पूरी जांच का आदेश दिया.

ये रिपोर्ट अब पूरी हो गई है और मृतकों के परिवारजनों को दिखाई गई है.

अगर इन मौतों को ग़ैरक़ानूनी माना गया तो उन सैनिकों को अदालत में पेश होना पड़ सकता है.

प्रधानमंत्री ने कहा है कि पहली गोली सेना की ओर से ही चली थी ये भी स्थापित हो चुका है लेकिन ये पूर्वनियोजित हो ऐसा नहीं था.

संबंधित समाचार