हज़ारों लोग उज़्बेकिस्तान की सीमा पर जमा

शरणार्थी

अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास का कहना है कि किर्गिस्तान में जातीय हिंसा के कारण 15 हज़ार उज़्बेक जान बचाकर उज़्बेकिस्तान में प्रवेश करना चाहते हैं. लेकिन उज़्बेकिस्तान अपनी सीमा बंद करना चाहता है.

ऐसा अनुमान है कि उज़्बेकिस्तान में लगभग 80 हज़ार शरणार्थी पहुँच गए हैं.

उज़्बेकिस्तान के उपप्रधानमंत्री अब्दुल्ला एरीपोव ने कहा है कि उनका देश अब और शरणार्थियों को स्वीकार नहीं कर सकता क्योंकि अब उन्हें रखने के लिए स्थान नहीं है.

उज़्बेकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सहायता की माँग की है और संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी संस्था एक आपात टीम भेजने जा रही है.

गुरुवार से किर्गिस्तान में जातीय हिंसा की शुरुआत हुई थी और इसमें अब तक 120 लोग मारे जा चुके हैं.

ये नस्ली दंगे सोवियत रूस के विघटन के बाद के सबसे भीषण दंगे हैं.

निशाने पर उज़्बेक

दंगों में मुख्य तौर से किर्गिस्तान के उज़्बेक बहुल इलाकों को निशाना बनाया गया है.

ओश शहर से शुरू हुआ दंगा रविवार को जलालाबाद में फैल गया.

जलालाबाद में रहनेवाले उज़्बेक लोग पड़ोसी देश उज़्बेकिस्तान की ओर भाग रहे हैं.

वहां पहले से ही ओश से आए हुए हज़ारों शरणार्थी पहुंचे हुए हैं. इनमें ज़्यादातर महिलाएं, बूढ़े और बच्चे हैं.

किर्गिस्तान की अंतरिम सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी है और 24 घंटों का कर्फ़्यू भी लगा दिया है. लेकिन अब भी दंगों पर काबू नहीं पाया जा सका है.

जलालाबाद और ओश में कई निजी संपत्तियों में आग लगा दी गई है.

किर्गिस्तान-उज़्बेकिस्तान सीमा पर जुटे शरणार्थियों ने सेना पर भी आरोप लगाया है कि वो हथियारबंद किर्गिज़ गुटों का साथ दे रही थी.

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