एयर इंडिया विमान हमले पर जांच रिपोर्ट

जस्टिस जॉन मेजर
Image caption जस्टिस मेजर ने कहा कि कई ग़लतियों के कारण कनाडा का प्रशासन इसे नहीं रोक पाया

कनाडा में हुई एक सार्वजनिक जांच का कहना है कि एक के बाद एक कई ग़लतियों की वजह से 1985 में एयर इंडिया के विमान को बम विस्फोट से नहीं बचाया जा सका.

बृहस्पतिवार को जांच आयोग के प्रमुख और कनाडा के सुप्रीम कोर्ट के अवकाशप्राप्त जज जॉन मेजर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह अक्षमता, लापरवाही और उपेक्षा घटना की जांच और अभियोजन के समय भी बनी रही.

कनाडा से भारत जा रहे इस विमान में विस्फोट हुआ और वह अटलांटिक महासागर में जा गिरा था. इस विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे.

कनाडा की पुलिस का कहना है कि इसे सिख चरमपंथियों ने उड़ाया था.

इस घटना के 20 साल बाद कनाडा के दो नागरिकों पर मुक़दमा भी चलाया गया लेकिन सबूतों के अभाव में उन्हें छोड़ दिया गया.

जब इसके विरोध में आवाज़ें उठीं तो कनाडा की सरकार एक आधिकारिक जांच बिठाने को तैयार हुई.

इस आयोग का काम था यह पता लगाना कि क्या कनाडा आतंकवाद के ख़िलाफ़ कुछ और कर सकता था.

उसे मारे गए लोगों के परिवारजनों के विचार भी सुनने को कहा गया था लेकिन इस हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों का पता लगाना उसका काम नहीं था.

बम हमला

23 जून, 1985 को जब एयर इंडिया की उड़ान संख्या 182 वैन्कूवर से शुरु होकर लंदन होती हुई भारत जा रही थी तब विमान में बम धमाका हुआ और वह आयरलैंड के परे अटलांटिक महासागर में जा गिरा.

मारे गए लोगों के रिश्तेदार शिकायत करते रहे हैं कि कनाडा की पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसी ने हमले के षड़यंत्र की पूर्व सूचना को अनदेखा किया और उसके बाद जब जांच हुई तो सबूत नष्ट कर दिए.

जांच आयोग के प्रमुख जस्टिस जॉन मेजर ने कहा, “हमारी पुलिस और सुरक्षा बलों की एक के बाद एक हुई अनेक भूलों की वजह से इस अमानुषिक अत्याचार को रोका नहीं जा सका. कनाडा की विभिन्न संस्थाओं और संगठनों ने अपनी ज़िम्मेदारियां नहीं निभाईं”.

जस्टिस मेजर ने कहा कि रॉयल कनेडियन माउंटिड पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसी के बीच प्रतिद्वन्द्विता के कारण सहयोग नहीं हो पाया.

उनका कहना था,“जिन एजेंसियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है उनके बीच आपस में तालमेल होना मूलभूत आवश्यकता है.”

हमले में मारे गए लोगों के परिवार जनों से प्रशासन जिस तरह पेश आया उसपर जज जॉन मेजर ने कस कर फटकार लगाई. उन्होने कहा कि अभी तक सरकार ने औपचारिक रूप से माफ़ी तक नहीं मांगी.

गंभीर हमला

सितंबर, 2001 में अमरीका पर विमानों से किए गए हमलों से पहले यह दुनिया का सबसे संगीन आतंकवादी हमला था.

अमरीका ने हमलों के बाद हवाई सुरक्षा और आतंकवादी ख़तरों से निपटने के लिए कई क़दम उठाए लेकिन कनाडा ने 80 के दशक में कुछ भी नहीं किया.

बृहस्पतिवार को कनाडा के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जॉन मेजर ने कहा कि एक के बाद एक हुई कई ग़लतियों के कारण कनाडा की पुलिस और सुरक्षा बल इस नृशंसता को नहीं रोक सके.

यह माना जाता है कि बम हमला कनाडा में रहने वाले सिख चरमपंथियों ने किया था जो भारत में एक स्वतंत्र ख़ालिस्तान के लिए हिंसात्मक संघर्ष कर रहे थे.

वो अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर हुई सैन्य कार्रवाई का भी बदला लेना चाहते थे.

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