जी-20 सम्मेलन में सहमति और मतभेद के स्वर

जी-20

कनाडा में चल रहे जी-20 देशों के सम्मेलन में नेताओं ने आर्थिक मंदी के दौर से उबरने के लिए प्रयास जारी रखने पर बल दिया.

लेकिन विभिन्न देशों के नेताओं में इसको हासिल करने पर मतभेद बने हुए हैं.

अमरीका के वित्त मंत्री टिमोथी गाइटनर ने कहा कि विश्व की अर्थव्यवस्था में जो सुधार आया है, वो विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था और अमरीका की वजह से आया है.

लेकिन उन्होंने यूरोप और जापान की इस बात के लिए आलोचना की है कि वे घरेलू बाज़ार में माँग को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त क़दम नहीं उठा रहे हैं.

दरअसल, अनेक यूरोपीय सरकारें बजट घाटे को कम करने के लिए खर्चों पर कटौती कर रही हैं.

लेकिन राष्ट्रपति ओबामा सहित कई अन्य नेताओं का मानना है कि इससे आर्थिक मंदी से उबरने में देरी हो सकती है.

मतभेद

ओबामा ने जी-20 देशों से कहा है कि वो एकजुट होकर काम करें और विकास को बढ़ावा दें.

Image caption भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं

अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने कहा है कि बजट घाटे को कम करने की यूरोपीय देशों की कोशिशें ग़लत दिशा में उठाया गया क़दम है. उन्होंने कहा कि अर्जेंटीना ने भी 2001 में ऐसा ही किया था जिसकी वजह से काफ़ी नुक़सान उठाना पड़ा था.

दरअसल विभिन्न देश इस बात को लेकर बँटे हुए हैं कि उन्हें बजट घाटे को कम करने पर जोर देना चाहिए या आर्थिक विकास में तेज़ी लाने के लिए काम करना चाहिए.

बीबीसी संवाददाता एंड्रयू वॉकर का कहना है कि जी-20 देशों में इस बात को लेकर दुविधा है कि घाटे को कम करने के लिए कौन सा समय सही होगा.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी जी-20 में हिस्सा लेने के लिए कनाडा में हैं. वो विभिन्न देशों के नेताओं से मुलाक़ात करेंगे.

रविवार को मनमोहन सिंह की मुलाक़ात कनाडा के प्रधानमंत्री से होगी. इस दौरान परमाणु, खनन, उच्च शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में समझौते होने की संभावना है.

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