किर्गिस्तान में जनमत संग्रह

Image caption किर्गिस्तान में संविधान संशोधन पर जनमत संग्रह हुआ

किर्गिस्तान के संविधान में संशोधन को लेकर जनमत संग्रह हुआ है. यह मतदान कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ.

इस प्रस्तावित संशोधन से संसद को अधिक अधिकार मिलेंगे और सितम्बर में आम चुनाव का रास्ता साफ़ हो जाएगा.

जून के महीने में ही देश के दक्षिण में किर्गिज़ और उज़्बेक जातियों के बीच गंभीर झड़पें हुई थीं जिसमें कई सौ लोग मारे गए थे.

उज़्बेक मतदाताओं ने बीबीसी को बताया कि वो अब भी बाहर निकलते डरते हैं.

लेकिन किर्गिस्तान के चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि कुल 57.74 प्रतिशत मतदान हुआ. देश की अंतरिम सरकार ने अप्रैल में राष्ट्रपति कुरमानबेक बकिएफ़ को अपदस्थ करने के बाद जनमत संग्रह कराने की घोषणा की थी.

जनमत संग्रह का परिणाम सोमवार को आने की उम्मीद है.

प्रतिकूल परिस्थितियां

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक स्थित बीबीसी के संवाददाता का कहना है कि जनमत संग्रह कराने के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं.

कोई दो सप्ताह पहले ही देश का दक्षिणी हिस्सा जातीय हिंसा की चपेट में था जिसमें स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार 275 लोग मारे गए थे लेकिन अन्य अधिकारियों ने 2,000 के मारे जाने की बात कही है.

हज़ारों लोगों के घर और व्यापार नष्ट हो गए और कोई 400,000 लोग विस्थापित हुए जिनमें अधिकतर अल्पसंख्यक उज़्बेक समुदाय के हैं.

अंतरिम राष्ट्रपति रोज़ा ओटनबयेवा का कहना है कि नया संविधान उनकी सरकार को वैधता प्रदान करेगा.

दक्षिणी नगर ओश में अपना वोट डालने के बाद उन्होने कहा, "हाल में जो हमने ज़ख़्म खाए हैं हम उनपर मरहम लगाना चाहते हैं".

इस जनमत संग्रह का समर्थन संयुक्त राष्ट्र, अमरीका और रूस सभी ने किया है.

अगर संविधान संशोधन को जन समर्थन मिल गया तो किर्गिस्तान एक संसदीय गणतंत्र बन जाएगा जिसमें सत्ता प्रधानमंत्री के हाथों में होगी.

ओटबायेवा 2011 तक अंतरिम राष्ट्रपति बनी रहेंगी और फिर पद छोड़ देंगी.

संसदीय चुनाव हर पांच साल में होंगे और राष्ट्रपति का चुनाव छ साल के लिए हुआ करेगा. कोई भी राष्ट्रपति दोबारा नहीं चुना जा सकेगा.

लेकिन विपक्षी दलों और कुछ मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह जनमत संग्रह बहुत जल्दी कराया गया है क्योंकि देश में अब भी उज़्बेक और किर्गिज़ लोगों के बीच गहरे विभाजन हैं.

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