ओबामा ने उत्तर कोरिया पर चीन से दो टूक बात की

  • 28 जून 2010
Image caption ओबामा का कहना है कि उन्होंने चीन के राष्ट्रपति से साफ़ साफ़ बात की है

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि उन्होंने चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ से दक्षिण कोरिया के युद्धपोत को डुबोने के मुद्दे पर दो टूक बातचीत की है.

दक्षिण कोरिया और एक अंतरराष्ट्रीय जाँच दल का कहना है कि ये युद्धपोत उत्तर कोरिया ने मार्च में डुबो दिया था.

अमरीका ने चीन से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव का समर्थन करने का अनुरोध किया है जिसमें उत्तर कोरिया की कड़ी आलोचना की गई है.

जी-20 सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ओबामा ने कहा,''मैं चीन की अपने पड़ोसी के साथ संयत व्यवहार करने की बात समझता हूँ. लेकिन संयत रहने और आँखें मूंद लेने में अंतर है.''

उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति हू जिंताओ उत्तर कोरिया के हद पार करने की बात को स्वीकार करेंगे.

दूसरी ओर उत्तर कोरिया इस बात से इनकार करता आया है कि दक्षिण कोरिया के युद्धपोत के डूबने में उसका कोई हाथ है.

हालांकि एक अंतरराष्ट्रीय जाँच दल ने कहा था कि युद्धपोत डुबोने के लिए उत्तर कोरिया ज़िम्मेदार है.

चीन की चुप्पी

जापान और दक्षिण कोरिया तो उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की घोषणा कर चुके हैं लेकिन चीन ने अब तक उत्तर कोरिया की निंदा नहीं की है.

चीन का कहना है कि वह इन सबूतों की पुष्टि करना चाहता है कि दक्षिण कोरियाई युद्धपोत को उत्तर कोरिया ने टारपीडो किया था.

इस घटना के बाद दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया से सारे कारोबारी संबंध ख़त्म करने की घोषणा कर दी थी और अब वह दबाव बना रहा है कि उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी कार्रवाई करे.

ऐसी किसी कार्रवाई की सहमति बनाने के लिए चीन का समर्थन ज़रुरी होगा.

हालांकि चीन कहता आया है कि जो भी दक्षिण कोरिया के युद्धपोत को डुबोने के लिए ज़िम्मेदार है, वो उसे बचाने की कोशिश नहीं करेगा.

लेकिन चीन ने अब तक कोई क़दम उठाने की घोषणा नहीं की है.

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच पिछले कुछ समय में संबंधों में सुधार आया था. लेकिन इस घटना ने संबंधों को फिर बिगाड़ दिया है.

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