लापता ईरानी वैज्ञानिक पहुंचा पाक दूतावास

Image caption वैज्ञानिक शाहराम अमीरी एक साल से लापता रहे हैं.

ईरान ने कहा है कि अमरीका के हाथों अगवा किए गए उनके एक परमाणु वैज्ञानिक ने वाशिंगटन में पाकिस्तानी दूतावास में शरण ली है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह इस बात की पुष्टि की है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने बीबीसी को बताया कि वैज्ञानिक शाहराम अमीरी ने वाशिंगटन में पाकिस्तानी दूतावास में शरण ली और वो फ़ौरन ईरान लौटना चाहते हैं.

शाहराम अमीरी एक साल पहले तीर्थयात्रा के लिए सऊदी अरब गए थे और वहीं से लापता हो गए.

जुलाई की शुरूआत में ईरान ने आरोप लगाया था कि उसके पास इस बात का सबूत है कि उसके वैज्ञानिक को अमरीका में रखा गया है. अमरीका ने उसे अगवा करने के आरोप को ग़लत बताया है.

वीडियो पहेली

दरअसल ये सारा मामला वीडियो वेबसाइट यू ट्यूब पर तीन अलग-अलग वीडियो के ज़रिए सामने आया है.

पहले वीडियो में एक व्यक्ति अपने को शाहराम अमीरी बताते हुए कहता है कि उसे मदीना से अगवा कर लिया गया और वो अब अमरीका राज्य एरिज़ोना में रहता है.

कुछ ही घंटों बाद जारी दूसरे वीडियो में एक वैसी ही शक्ल वाला व्यक्ति ये दावा कर रहा है कि वो अमरीका में बेहद खुश है, स्वतंत्र है और सुरक्षित है.

तीसरा वीडियो जो ईरानी टेलिविज़न पर 29 जून को दिखाया गया उसमें एक व्यक्ति अपने को गुमशुदा वैज्ञानिक बताते हुए कहता है: “मैं शाहराम अमीरी ईरानी गणराज्य का नागरिक हूं और कुछ ही मिनट पहले मैं वर्जीनिया में अमरीकी एजेंटों के क़ब्ज़े से भागने में कामयाब हो गया हूं.”

उसमें कहा गया, “इस वक्त मैं एक सुरक्षित जगह पर ये वीडियो बना रहा हूं. मुझे किसी भी समय फिर से गिरफ़्तार किया जा सकता है.”

उस वीडियो में दूसरे वीडियो को ग़लत बताया गया है जिसमें ये दावा था कि वो अपनी मर्ज़ी से एरिज़ोना में रह रहा है.

तीसरा वीडियो एक अपील के साथ ख़त्म होता है जिसमें कहा गया है कि ईरानी अधिकारी और मानवाधिकार संगठन अमरीकी सरकार पर उसकी रिहाई के लिए दबाव बनाएं.

उसमे कहा गया है, "मैं स्वतंत्र नहीं हूं और मुझे अपने परिवार से संपर्क करने की छूट नहीं है. यदि कुछ हो जाता है और मै घर ज़िंदा नहीं लौटता हूं तो इसकी ज़िम्मेदारी अमरीकी सरकार पर होगी."

उसमें कहा गया, “ मैं किसी अमरीकी धमकी या रिश्वत के बावजूद अपने देश के साथ धोखा करने को तैयार नहीं था.”

एक अमरीकी अधिकारी ने एएफ़पी समाचार एजेंसी को बताया कि ये सारे आरोप “बकवास” हैं.

बीबीसी के तेहरान संवाददाता का कहना है कि ये मामला अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों के लिए काफ़ी शर्मिंदगी वाला हो सकता है क्योंकि वो पाकिस्तानी दूतावास में प्रवेश नहीं कर सकते.

लेकिन वो वैज्ञानिक को देश छोड़ने से ज़रूर रोक सकते हैं.

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