थाइलैंड में 19 प्रांतों में आपातकाल बढ़ा

  • 6 जुलाई 2010
थाइलैंड में आपातकाल बढ़ा
Image caption राजधानी बैंकॉक समेत 19 प्रांतों में अगले तीन महीनों के लिए आपातकाल बढ़ाया गया.

थाइलैंड में सरकार ने राजधानी बैंकॉक समेत 19 प्रांतों में आपातकाल बढ़ा दिया है.सरकार का कहना है कि हिंसा की आशंका को देखते हुए ये फ़ैसला किया गया है.

पांच दूसरे प्रांतों से तीन महीने की समय सीमा समाप्त होन के बाद आपातकाल हटा लिया गया है.

इस साल के शुरु में सरकार विरोधी प्रदर्शन के बाद सरकार ने आपातकाल की घोषणा की थी. उस हिंसक प्रदर्शन में 90 लोग मारे गए थे.

प्रधानमंत्री अभिसीत विजयजीवा ने सोमवार को बीबीसी से कहा था कि धीरे धीरे आपातकाल को हटा लिया जाएगा.

कठोर क़ानून

आपातकाल के दौरान एक साथ पांच से ज़्यादा लोग सार्वजनिक रुप से इकट्ठा नहीं हो सकते और सुरक्षा बल शक के बिना पर किसी को भी बिना आरोप तय किए 30 दिनों तक हिरासत में रख सकते हैं.

मानवधिकार संगठनों के अनुसार ये बहुत ही कठोर क़ानून हैं. वो आपातकाल हटाने की मांग कर रहे हैं.

मानवधिकार संगठनों का तर्क है कि इस क़ानून के रहते विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों के भूमिगत होने की आशंका है.

सेंटर फ़ॉर दी रिज़ोलुशन ऑफ़ इमरजेंसी सिचुएंशंस अथवा क्रेस ने सरकार को तमाम प्रभावित प्रांतों में आपातकाल बढ़ाने की सिफ़ारिश की थी.

क्रेस की कमेटी में सुरक्षा बल, पुलिस, सरकारी मंत्रालय सभी के प्रतिनीधी होते हैं. लेकिन इसमें मुख्य भूमिका सेना के प्रतिनिधियों की होती है.

इस साल अप्रैल और मई के महीने में रेड शर्ट कहलाने वाले सरकार विरोधी आंदोलनकारियों से निपटने के लिए क्रेस का गठन किया था.

Image caption अप्रैल-मई में हिंसा के दौरान 90 से ज्यादा लोग मारे गए थे.

भूमिगत आंदोलन की आशंका

सरकार विरोधी प्रदर्शन से राजधानी बैंकॉक का अधिकतर हिस्सा प्रभावित था. आख़िकार सेना की मदद से विरोध को ख़त्म किया गया,प्रदर्शनकारियों के नेताओं को गिरफ़्तार किया गया, और सरकार के ख़िलाफ़ रहने वाली मीडिया को शांत कर दिया गया.

प्रधानमंत्री अभिसीत विजयजीवा का कहना है कि वो सुलह सफ़ाई की कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन बैंकॉक के बीबीसी संवाददाता एलेस्टर लीटहेड का कहना है कि थाइलैंड में भूमिगत एक रेड शर्ट आंदोलनकारी ने चेतावनी दी है कि एक भूमिगत दल बम बनाने का प्रशिक्षण ले रहा है.

क्रेस के प्रवक्ता कर्नल सैनसर्न कायकमनर्ड के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने जो हथियार लूटे थे अभी तक उनको बरामद नहीं किया जा सका है.

इसलिए आपातकाल से सुरक्षा व्यवस्था और आर्थिक स्थायित्व बनाए रखने में मदद मिलेगी.

आपातकाल के दौरान 400 से ज़्यादा लोग गिरफ़्तार किए गए हैं.

इंटरनेशनल क्राइसीस ग्रुप ने आपातकाल हटाने की मांग की है और सचेत किया है कि सरकार विरोधी आंदोलनकारियों की निराशा जायज़ है और वे संभवत: भूमिगत होने और ग़ैर क़ानूनी तथा हिंसक रास्ता अपनाने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं.

ग्रुप की रिपोर्ट ने हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करने और विरोधी मीडिया पर पाबंदी हटाने की मांग की है.

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