वहां नहीं आता शादियों का मौसम

बीएसएफ़
Image caption विवाह के इच्छुक लोग बीएसएफ़ के जवानों की कड़ी पूछताछ से घबरा कर गांवों का रुख़ नहीं करते

पश्चिम बंगाल में कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां शहनाई को तरस गए हैं कान, और बरसों से नहीं उठी है किसी की डोली, लोग शहनाई की आवाज तक भूल गए हैं.

बीते छह-सात वर्षों से उन गांवों में कोई लड़की अपने बाबुल का घर छोड़ कर पिया के घर नहीं जा सकी है.

जलपाईगुड़ी जिले में बांग्लादेश की सीमा से सटे आधा दर्जन गांवों में शादियां नहीं होने की वजह से वहां कुंवारे-कुंवारियों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है.

बेरूबाड़ी इलाके के सिपाईपाड़ा, खुदीपाड़ा, खाकीरडांगा और बांगलपाड़ा गांव में बीते कई वर्षों से न तो कोई बारात नहीं आई है और न ही गई है.

आखिर ऐसा क्या है इन गांवों में जो यहां की लड़कियां और लड़के कुंवारे ही घर बैठे अपनी किस्मत को कोस रहे हैं.

इसकी वजह है अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी कंटीले तारों की बाड़.

अपनी भौगोलिक स्थिति के चलते यह गांव कंटीले तारों की बाड़ से बाहर चले गए हैं, अब इनको बाड़ लगा कर सीमा के भीतर लाने की कोशिश की जा रही है.

यह गांव हैं तो भारत के ही हिस्से. लेकिन सीमा पर बाड़ लग जाने की वजह वहां तक आना-जाना बेहद मुश्किल हो गया है.

सीमा पर बने गेट पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों की पूछताछ से तंग होकर अब लड़के वालों ने उन गांवों का रुख करना ही छोड़ दिया है.

गांव के एकाध युवक बाहर जा कर मंदिरों में शादियां कर लेते हैं. लेकिन पत्नी के साथ लौटने पर उनको भी भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है.

लड़कों की शादी तो फिर भी बाहर हो जाती है. लेकिन जब तक बारात गांव में नहीं आएगी, बाबुल के घर से डोली भला कैसे उठेगी?

सिपाईपाड़ा के सुनील मोदक कहते हैं, ‘जब भी लड़के वाले बातचीत के लिए यहां आने की कोशिश करते हैं, बीएसएफ के जवान उनसे लंबी पूछताछ करने लगते हैं. उसे बाप-दादा और रहने की जगह के बारे में पूछा ही नहीं जाता, सबूत दिखाने को भी कहा जाता है.

स्थानीय महिला स्वनिर्भर समूह की प्रमुख कांति बताती है कि इन गांव में लगभग डेढ़ सौ युवतियां शादी का इंतजार कर रही हैं.

उनका आरोप है कि बीएसएफ के जवान रिश्ते के लिए आनेवालों को उल्टी-सीधी बातें कह कर भगा देते हैं.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विरोध करने पर बीएसएफ की ओर से धमकी दी जाती है.

उधर, बीएसएफ के एक अधिकारी एस. चटर्जी जवानों पर आम लोगों को परेशान करने के आरोपों को निराधार बताते हैं.

वे कहते हैं, "यह सही नहीं है कि शादियां एकदम बंद हैं. कंटीले तारों की बाड़ से बाहर होने की वजह से कुछ समस्याएँ हैं. शायद इसी वजह से लोग उन गांवों में शादी नहीं करना चाहते."

इलाके के बीडीओ प्रसून बर्मन भी मानते हैं कि कंटीले तारों की बाड़ से बाहर होने की वजह से उन गांवों के लोगों को कई तरह की समस्याओँ का सामना करना पड़ रहा है. वे बताते हैं, "अब इन छह गांवों को जल्दी ही कंटीले तारों की बाड़ के भीतर कर लिया जाएगा."

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