जापान में संसद के उपरी सदन के लिए मतदान

  • 11 जुलाई 2010
जापान के प्रधानमंत्री (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption 10 महीने पुरानी सरकार पर जनमत संग्रह

जापान में संसद के उपरी सदन के लिए मतदान शुरु हो गए हैं.

ये चुनाव जापान में सत्ताधारी पार्टी के दस महीने के काम काज पर जनमत संग्रह के रुप में देखे जा रहे हैं.

सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी या डीपीजे इस चुनाव के ज़रिए उपरी सदन में बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है.

उपरी सदन में बहुमत के बल पर सत्ताधारी पार्टी जापान के क़र्ज़ की समस्या को निपटाने की कोशिश करेगी.

इस समय जापान में क़र्ज़ की हालत बहुत ख़राब है और अमीर देशों में जापान की स्थिति सबसे ज़्यादा चिंताजनक है.

क़र्ज़ की समस्या

शनिवार को चुनाव प्रचार समाप्ति के समय प्रधानमंत्री नाओटो कान ने कहा कि जापान की अर्थव्यवस्था ग्रीस से बीस तीस गुना ज़्यादा है और जापान का क़र्ज़ भी अधिक है .इसलिए कोई भी देश जापान को नहीं बचा सकता.

सत्ताधारी डीपीजे पिछले साल यानि 2009 के अगस्त में सत्ता में आई थी. लगभग पांच दशकों के बाद लिब्रल डेमोक्रेटिक पार्टी को हराकर डीपीजे सत्ता में आई थी.

लोगों की राय के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि डीपीजे को उपरी सदन में बहुमत नहीं मिल पाएगा. लेकिन अगर ऐसा सचमुच होता है तो इससे संसद में भारी गतिरोध पैदा हो सकता है.

सत्ताधारी पार्टी की हालत अच्छी नहीं है इसका अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नाओटो कान की लोकप्रियता घटती जा रही है.

टोकयो के बीबीसी संवाददाता रोलैंड ब्यूर्क का कहना है कि चुनाव में ख़राब प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री को नए सहयोगी खोजने पड़ेंगे या हो सकता है कि ख़ुद सत्ताधारी पार्टी प्रधानमंत्री को हटा दे.

ऐसी ख़बरें आ रहीं थीं कि सरकार बिक्रि कर को बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने जा रही है. सरकार के इस प्रस्तावित क़दम से लोगों में काफ़ी रोश था. अंत में ख़ुद प्रधानमंत्री को आगे आकर इसका खंडन करना पड़ा था कि सरकार ने ऐसा कोई फ़ैसला नहीं किया है.

संबंधित समाचार