आठ राज्यों में अफ़्रीका से अधिक ग़रीब

  • 12 जुलाई 2010
छत्तीसगढ़ का एक गाँव
Image caption छत्तीसगढ़ के एक गाँव में एक रोगी महिला को अस्पताल ले जा रहा बच्चा

ग़रीबी का एक नए तरह से माप करनेवाली पद्धति का कहना है कि भारत के आठ प्रदेशों में अफ़्रीका के 26 देशों से अधिक ग़रीब बसते हैं.

मल्टीडायमेन्शनल पावर्टी इंडेक्स (एमपीआई) नामक इस नई माप को ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग ने संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनडीपी के साथ मिलकर बनाया है.

इस नई माप को यूएनडीपी की सालाना मानव विकास रिपोर्ट की 20वीं वर्षगांठ पर प्रकाशित होनेवाली रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा जो अक्तूबर में आएगी.

मगर ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय और यूएनडीपी की ओर से एमपीआई के आधार पर सामने आए निष्कर्षों को इस सप्ताह लंदन में सार्वजनिक किया जा रहा है.

नई माप को बनानेवाले विशेषज्ञों ने बताया है कि भारत के आठ राज्यों में 42 करोड़ 10 लाख लोग़ ग़रीब हैं जो अफ़्रीका के 26 निर्धनतम देशों में ग़रीबों की संख्या से अधिक है जहाँ 41 करोड़ लोग ग़रीब हैं.

जिन आठ भारतीय राज्यों के ग़रीबों का उल्लेख किया गया है वे हैं – बिहार, झारखंड, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और पश्चिम बंगाल.

साफ़ तस्वीर

एमपीआई माप बनानेवाले विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई पद्धति से ग़रीबी का सामना करनेवाले लोगों की एक बहुआयामी तस्वीर को समझा जा सकता है जिससे विकास के संसाधनों का और प्रभावी तरीक़े से उपयोग हो सकता है.

इस नई माप में एक सामान्य परिवार में कई तरह की विपन्नताओं का लेखा-जोखा लिया जाता है जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, संपत्ति और उपलब्ध सेवाएँ शामिल हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि इन कारकों से भारी ग़रीबी की एक संपूर्ण तस्वीर सामने आती है जो कि केवल आय के आधार पर ग़रीबी मापने की पद्धति से संभव नहीं हो पाता.

एमपीआई को विकसित करनेवाले दल की प्रमुख, ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय की – ग़रीबी एवं मानवीय विकास शाखा – की निदेशक डॉक्टर सबीना अल्किरे कहती हैं,"एमपीआई एक बहुत ही अधिक साफ़ तस्वीर लेनेवाला लेंस है जिससे निर्धनतम परिवारों के सामने खड़ी क़िस्म-क़िस्म की चुनौतियाँ देखी जा सकती हैं."

ग़रीबी की माप की इस नई बहुआयामी पद्धति को मेक्सिको में राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल में लाया जा रहा है और चिली और कोलंबिया में इसके बारे में विचार किया जा रहा है.

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