ईरान वापस लौट रहे हैं शहराम अमीरी

  • 14 जुलाई 2010
Image caption वैज्ञानिक शाहराम अमीरी एक साल से लापता रहे हैं

ईरान ने कहा है कि अमरीका में एक साल पहले गायब हो जाने वाले उनके वैज्ञानिक वापस देश लौट रहे हैं.

ईरान का कहना है कि उनके वैज्ञानिक शहराम अमीरी को अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने किडनैप कर लिया था.

हालांकि अमरीका का कहना है कि अमीरी अपनी इच्छा से अमरीका आए थे और वो हमेशा से वापस ईरान लौटने के लिए स्वतंत्र थे.

ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमीरी अमरीका स्थित पाकिस्तानी दूतावास में शरण लेने के बाद अब किसी तीसरे देश ( जिसका नाम नहीं बताया गया है) के रास्ते ईरान लौट रहे हैं.

ईरान ने कहा है कि अमीरी ने ईरानी अधिकारियों से बातचीत की है और अधिकारियों ने सुरक्षा और मानसिक शांति का आश्वासन दिया है.

इससे पहले अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि वॉशिंगटन में पाकिस्तान दूतावास में पहुँचे ईरानी वैज्ञानिक अपने देश वापस लौटने के लिए स्वतंत्र हैं.

उनका कहना था कि वे हमेशा से ही लौटने के लिए स्वतंत्र थे.

अमरीका ने ईरान के इस दावे का खंडन किया है कि उनके वैज्ञानिक शाहराम आमिरी का अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने उस समय अपहरण कर लिया था जब वे सऊदी अरब में हज करने गए हुए थे.

लेकिन अब वे कह रहे हैं कि वे ईरान लौटना चाहते हैं.

वे एक साल से लापता थे लेकिन तीन वीडियो फ़िल्में वैज्ञानिक के बारे में विरोधाभासी जानकारियाँ दे रही हैं और इससे भ्रम बढ़ गया है.

दावा और खंडन

ईरान की मीडिया का कहना है कि वे एक ईरानी विश्वविद्यालय में शोध का कार्य करते हैं लेकिन कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि वे ईरान के परमाणु ऊर्जा एजेंसी में काम करते हैं और उन्हें ईरान के विवादास्तद परमाणु कार्यक्रम की गहरी जानकारी है.

अमरीका के टीवी नेटवर्क एबीसी ने मार्च में ख़बर दी थी कि आमिरी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को छोड़ दिया है और अब वे सीआईए को सहयोग दे रहे हैं. लेकिन इस महीने की शुरुआत में तेहरान ने दावा किया था कि उसके पास इस बात के सबूत हैं कि वैज्ञानिक अमरीकी क़ैद में हैं.

लेकिन अमरीका इन आरोपों का खंडन करता रहा है.

अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता पीजे क्राउली ने कहा है, "वे अपनी इच्छा से अमरीका में हैं और निश्चित तौर पर वे वापस लौटने के लिए स्वतंत्र हैं."

उनका कहना था, "दरअसल उन्हें सोमवार को ही ईरान लौटना था लेकिन उनके लौटने के लिए आवश्यक इंतज़ाम नहीं हो सके."

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भी दोहराया है कि ईरानी वैज्ञानिक जब चाहें अपने देश लौट सकते हैं लेकिन उन्होंने तीन अमरीकी युवाओं को ईरान में रोक कर रखे जाने का मुद्दा उठाया और कहा है कि उन्हें अपने परिवार के पास वापस लौटने की अनुमति देनी चाहिए.

वीडियो

इस पूरे मामले में दावे और खंडन के बीच तीन वीडियो फ़िल्मों ने और भ्रम पैदा कर दिया है.

ये तीनो वीडियो यू-ट्यूब पर हैं.

पहले वीडियो में एक व्यक्ति अपने को शाहराम अमीरी बताते हुए कहता है कि उसे मदीना से अगवा कर लिया गया और वो अब अमरीका राज्य एरिज़ोना में रहता है.

कुछ ही घंटों बाद जारी दूसरे वीडियो में एक वैसी ही शक्ल वाला व्यक्ति ये दावा कर रहा है कि वो अमरीका में बेहद खुश है, स्वतंत्र है और सुरक्षित है.

तीसरा वीडियो जो ईरानी टेलिविज़न पर 29 जून को दिखाया गया उसमें एक व्यक्ति अपने को गुमशुदा वैज्ञानिक बताते हुए कहता है: “मैं शाहराम अमीरी ईरानी गणराज्य का नागरिक हूं और कुछ ही मिनट पहले मैं वर्जीनिया में अमरीकी एजेंटों के क़ब्ज़े से भागने में कामयाब हो गया हूं.”

उसमें कहा गया, “इस वक्त मैं एक सुरक्षित जगह पर ये वीडियो बना रहा हूं. मुझे किसी भी समय फिर से गिरफ़्तार किया जा सकता है.”

उस वीडियो में दूसरे वीडियो को ग़लत बताया गया है जिसमें ये दावा था कि वो अपनी मर्ज़ी से एरिज़ोना में रह रहा है.

तीसरा वीडियो एक अपील के साथ ख़त्म होता है जिसमें कहा गया है कि ईरानी अधिकारी और मानवाधिकार संगठन अमरीकी सरकार पर उसकी रिहाई के लिए दबाव बनाएं.

उसमे कहा गया है, "मैं स्वतंत्र नहीं हूं और मुझे अपने परिवार से संपर्क करने की छूट नहीं है. यदि कुछ हो जाता है और मै घर ज़िंदा नहीं लौटता हूं तो इसकी ज़िम्मेदारी अमरीकी सरकार पर होगी."

उसमें कहा गया, “ मैं किसी अमरीकी धमकी या रिश्वत के बावजूद अपने देश के साथ धोखा करने को तैयार नहीं था.”

एक अमरीकी अधिकारी ने एएफ़पी समाचार एजेंसी को बताया कि ये सारे आरोप “बकवास” हैं.

बीबीसी के तेहरान संवाददाता का कहना है कि ये मामला अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों के लिए काफ़ी शर्मिंदगी वाला हो सकता है क्योंकि वो पाकिस्तानी दूतावास में प्रवेश नहीं कर सकते.

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