शाकाहार का अनोखा अभियान

Image caption मिशैल ने पालक के पत्तों की पोशाक पहन कर शाकाहार की वकालत की

कीनिया के नैरोबी शहर में एक महिला ने देशवासियों को मांस खाना छोड़ने के लिए प्रोत्साहन देने का एक नया अंदाज़ निकाला.

मिशेल ओढिआम्बो ने पालक के पत्तों की पोशाक पहन कर शहर का दौरा किया.

पशुओं के साथ नैतिक आचरण करने की पक्षधर संस्था की मिशेल ओढिआम्बो को ‘लैटिस लेडी’ या सलाद की देवी का नाम दिया गया है.

एक तो इसलिए क्योंकि वो पत्तों से बनी पोशाक पहने हैं और दूसरा इसलिए क्योंकि वो कीनियावासियों को मांस खाना छोड़ने के लिए प्रोत्साहन दे रही हैं.

इस अभियान के आयोजकों का कहना है कि मांस खाने की वजह से अफ़्रीका में लोग भूखे मर रहे हैं.

मिशेल ओढिआम्बो कोई आठ साल पहले शाकाहारी बनी थीं. उनका कहना है कि मांस के लिए जिन मवेशियों को पाला जाता है उन्हे इतना खिलाना पड़ता है कि उससे बहुत से लोगों की भूख मिटाई जा सकती है.

मिशेल अपने हाथों में एक पोस्टर लिए हुए हैं जिसपर लिखा है, ‘शाकाहार को धीरे धीरे हावी होने दें’.

उनकी अनोखी पोशाक और संदेश देखकर लोग हैरान हुए तो उन्होने बताया कि उन्हे इस बात से भी परेशानी होती है कि इन मवेशियों के साथ किस तरह का बर्ताव किया जाता है.

“उन्हे बहुत ही तंग जगहों में रखा जाता है. उनको बधिया बनाया जाता है. ज़िंदा उनकी खाल खींची जाती है और ये सब उन्हे बिना किसी दर्दनिवारक दवा दिए किया जाता है. क्या ये सही है”.

मिशेल ने रेस्तरां चलाने वालों से आग्रह किया कि वो शाकाहारियों के लिए व्यंजन बनाया करें.

लेकिन नायरोबी स्थित बीबीसी की संवाददाता का कहना है कि कीनिया में मांस न खाने वालों को अकसर ग़रीबी से जोड़ा जाता है.

कीनिया के पूर्वोत्तर भाग से आए मोहम्मद उसमान मिशेल से पूछते हैं, “अगर हम मांस न खाएं तो क्या खाएं. मांस हमारा मूल भोजन है”.

खाने पीने की आदतें बदलना इतना आसान काम नहीं होता.