हज़ारों बोतल कफ़ सिरप के साथ मेजर गिरफ़्तार

  • 17 जुलाई 2010

वर्ष 1982 में बांग्लादेश में फ़ेंसीडिल पर प्रतिबंध लगा था. लेकिन वहाँ हज़ारों बोतल फ़ेसीडिल ले जाते हुए एक मेजर की गिरफ़्तारी से संकेत मिला है कि बांग्लादेश में इसका मादक पदार्थ के तौर पर इस्तेमाल कितना प्रचलित है.

ढाका में बीबीसी संवाददाता एनब्रासन एतिराजन के अनुसार बांग्लादेश में इस कफ़ सिरप ने दवा की जगह एक नशीले पदार्थ का रूप अपना लिया है.

प्रति वर्ष बांग्लादेशी अधिकारी हजारों बोतल फेंसीडिल कफ़ सिरफ़ ज़ब्त करते हैं. इसके बावजूद इसकी तस्करी में कोई कमी नहीं आई है.

हाल के वर्षों में ये पहला मामला है जब कफ़ सिरप की तस्करी के मामले में किसी सैन्य अधिकारी को गिरफ़्तार किया गया है. इस दवा का बांग्लादेश में नशीले पदार्थ के तौर पर सबसे ज़्यादा दुरुपयोग होता है. ये तंत्रिकाओं को शिथिल कर देता है और इसकी वजह से नींद आने लगती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सेवन करने वाले के लीवर और केंद्रीय तंत्रिकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और लंबे समय तक इसका सेवन करने वाले की जान भी जा सकती है.

जहाँ बंग्लादेश में इसकी बिक्री पर प्रतिबंध है वहीं भारत में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है और हज़ारों बोतल सिरप की तस्करी भारत से बांग्लादेश में होती है.

इसे भारत में किसी भी दुकान से ख़रीदा जा सकता है. लेकिन भारत से बांग्लादेश पहुँचने के बाद इसकी क़ीमत छह से सात गुना बढ़ जाती है.

बांग्लादेश की सरकार इसकी तस्करी रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है लेकिन हाल में ज़ब्त कि गई हजारों बोतलों से संकेत मिलता है कि प्रतिबंध के बावजूद इसकी मांग बांग्लादेश में बढ़ रही है.

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