बच्चों पर जादू-टोना करने के आरोप का चलन

  • 18 जुलाई 2010

बच्चों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ़ ने कहा है कि अफ़्रीका के सबसे गरीब देशों में बच्चों पर जादू-टोना करने के आरोप लगाने का चलन बढ़ रहा है.

यूनिसेफ़ के मुताबिक ऐसा शहरीकरण, युद्ध जैसी परिस्थितियों और बच्चों के पालन-पोषण के बढ़ते खर्च की वजह से हुआ है.

यूनिसेफ़ का कहना है कि समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग के बच्चों पर ही जादू-टोना करने के आरोप लगाए जा रहे हैं.

इनमें अनाथ और सड़कों पर रहने वाले बच्चे शामिल हैं. इसके अलावा मानसिक या शारीरिक रूप से विकलांग बच्चे और ऐल्बाइनो (वे जिनकी त्वचा जन्म से ही अपना रंग नहीं ले पाती और सफे़द दिखने लगती है) भी जादू टोने का शिकार बनते हैं.

इनमें भी ज़्यादातर 8 से 14 साल के बच्चे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक जादू-टोना के अपराध की सज़ा कड़ी है.

नज़रिया बदलना मुश्किल

यूनिसेफ़ के पश्चिमी और दक्षिणी अफ्रीका के बाल सुरक्षा अधिकारी योकिम टीस कहते हैं, “बच्चों से जादू टोना करने का आरोप ज़बरदस्ती कबूल करवाया जाता है और फिर उनसे जादू टोने की विद्या देने वाले के बारे में जानकारी मांगी जाती है. अक्सर बच्चों को पीटकर उनके घर से दूर भेज दिया जाता है. अगर हम किनचासा शहर की ही बात करें तो सड़कों पर रहने वाले बीस हज़ार बच्चों पर जादू टोना करने का आरोप लगाया गया है.”

बच्चों को जलाने और जान से मारने का चलन भी बढ़ा है. उन पर से भूत का साया खत्म करने के लिए कई बच्चों की आंख या कान में पेट्रोल डाल दिया जाता है.

रिपोर्टों के मुताबिक जादू टोना का असर हटाने के लिए झाड़फूंक करने के ज़्यादा से ज़्यादा पैसे लेने की वजह से कुछ धार्मिक वक्ताओं की मुसीबत बढ़ी है.

नाइजीरिया में झाड़-फूंक करने के लिए ढाई सौ डॉलर वसूलने वाले ऐसे एक वक्ता को पकड़ा भी गया है.

कई देशों में सरकारें बच्चों की सहायता तो कर रही हैं लेकिन जादू टोना के बारे में मान्यताएं ऐसी हैं कि जनता को समझाना बेहद मुश्किल है.

बाल सुरक्षा अधिकारी योकिम टीस बताते हैं, “नाइजीरिया और कॉंगो में सरकारों ने कुछ कदम उठाए हैं. घर से भगाए गए बच्चों के लिए सुविधाएं जैसी पहल की गई है लेकिन हमने देखा है कि इसके बाद बच्चों को समाज से दोबारा जोड़ने के बारे में कुछ नहीं किया जा रहा.”

यूनिसेफ़ के मुताबिक बच्चों पर जादू टोना का आरोप लगाना एक नया चलन है. 10 से 20 साल पहले तक आरोप महिलाओं औऱ बुज़ुर्गों पर लगते थे.

यूनिसेफ़ ये भी मानता है कि वो जादू टोना खत्म तो नहीं कर सकता लेकिन बच्चों के खिलाफ हिंसा को गलत बताते हुए कहा गया है कि वो इसे रोकने की पूरी कोशिश करेगा.