एवरेस्ट से ली तस्वीरों से ग्लेशियर पिघलने की पुष्टि

  • 18 जुलाई 2010
Image caption एवरेस्ट की 1921 में ली गई तस्वीर(बाएं) व 2010 की तस्वीर (दाएं)

एवरेस्ट पर्वत से ली गई ताज़ा तस्वीरों से इस बात की पुष्टि हुई है कि 89 वर्ष में हिमालय से ख़ासी बर्फ़ पिघल गई है. इस सदी के मध्य तक हिमालय के अनेक ग्लेशियर बुरी तरह प्रभावित हो जाएँगे.

वर्ष 1921 में ब्रितानी पर्वतारोही जार्ज मेलरी ने एवरेस्ट के जिन हिस्सों से तस्वीरें ली थीं, 89 वर्ष बाद फिर वहीं से तस्वीरें ली गई हैं.

द एशिया सोसाइटी ने इन तस्वीरों को खींचने की व्यवस्था की और फिर तस्वीरों का तुलनात्मक अध्ययन किया है.

सोसाइटी ने कहा है कि इन तस्वीरों से बहुत चौकाने वाले तथ्य सामने आएं हैं. हिमालय से बर्फ़ बहुत तेज़ी से घट रही है. पिछले 89 साल में स्थिति ख़तरनाक हो गई है.

सूखते व सिकुड़ते ग्लेशियर

मेलरी ने एवरेस्ट के उत्तरी हिस्से से तस्वीरें ली थीं. उन तस्वीरों में बर्फ़ की सफे़द चादर अंग्रेजी के 'एस' अक्षर के आकार की दिखती थी.

लेकिन वर्ष 2010 में ठीक उसी स्थान से पर्वतारोही डेविड ब्रेशियर्स ने भी तस्वीरें खींची लेकिन उसमें रोंगबुक ग्लेशियर सूखा व सिकुड़ा हुआ दिखा.

सोसाइटी का कहना है, "ब्रेशियर्स ने ठीक उसी जगह से बड़ी कुशलता से एक के बाद एक कई तस्वीरे लीं. इन तस्वीरों ने एवरेस्ट पर्वत से लगे ग्लेशियरों की पिघलती बर्फ़ से होने वाले नुकसान को रेखांकित किया है."

हिमालय दुनिया का सबसे बड़ा बर्फ़ भंडार है.

सोसाइटी के बयान में कहा गया है - "ऊंचे ग्लेशियरों से पिघले पानी वाले हिमनदों गंगा, ब्रह्मपुत्र, सालवीन, इरावदी, मेकोंग, यांगत्से और येलो नदी पर करोड़ों लोगों की आजीविका निर्भर है. यदि बर्फ़ के पिघलने की गति यही रही है तो इस सदी के मध्य तक कई ग्लेशियरों के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है."

ब्रेशियर्स उसी रास्ते पर गए जिस पर जाकर 1921 में एवरेस्ट पर गए ब्रिटिश पर्वतारोही दल और सर्वेक्षणकर्ता व फ़ोटोग्राफर मेजर एडवर्ड ह्वीलर और फ़ोटोग्राफर जार्ज मेलरी ने तस्वीरें खींची थीं.

न्यूयार्क में द एशिया सोसाइटी की बैठक में ब्रेशियर्स ने कहा, "हिमालय के मध्य व पूर्वी हिस्से में बर्फ़ जिस दर से पिघल रही है, वह विध्वंसकारी है. "

उन्होंने सिर्फ़ मेलरी का ही नहीं बल्कि इटली के फ़ोटोग्राफर विटोरियो सेला का भी अनुसरण किया जिन्होंने 19वीं और 20वीं सदी के बीच इस विषय पर काम किया था.

तिब्बत, नेपाल और पाकिस्तान के के-2 के नज़दीक के ग्लेशियर से ली गई उस समय और अब की तस्वीरों से परिणाम निकलता है कि ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं.

हिमालय के ग्लेशियरों से बर्फ़ के पिघलने का मुद्दा एक भारतीय वैज्ञानिक के संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में किए गए दावे से विवादस्पद हो गया.

उनका दावा था कि 2035 तक सभी ग्लेशियर ख़त्म हो जाएंगे, हालाँकि बाद में उन्होंने कहा कि उनके बयान को ग़लत ढंग से पेश किया गया था.

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