कोरियाई सीमा पर तनाव, सैनिक अभ्यास शुरू

Image caption इस साझा अभ्यास में 20 युद्धपोत, 200 विमान और 8,000 अमरीकी और दक्षिण कोरियाई सैनिक शामिल हो रहे हैं.

दक्षिण कोरिया और अमरीका ने उत्तर कोरिया की धमकियों के बावजूद उसकी सीमा से लगे जापान सागर में एक साझा सैनिक अभ्यास शुरू किया है.

कोरिया प्रायद्वीप की पूर्वी सीमा पर चल रहे इस साझा अभ्यास को उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ सैन्य शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है. ये अभ्यास चार दिन तक चलेगा.

इस मार्च में दक्षिण कोरिया का एक युद्धपोत डुबो दिया गया था जिसमें 46 दक्षिण कोरियाई नौसैनिक मारे गए थे.

एक अंतरराष्ट्रीय जांच ने इसके पीछे उत्तर कोरिया का हाथ बताया था लेकिन उत्तर कोरिया ने इस आरोप से इंकार किया है.

रविवार को शुरू हुए इस साझा सैनिक अभ्यास में नौसेना और वायु सेना दोनों ही भाग ले रहे हैं और इसमें 20 जहाज़, 200 विमान और 8,000 अमरीकी और दक्षिण कोरियाई सैनिक शामिल हैं.

अमरीका और दक्षिण कोरिया दोनों ही ने कहा है कि वो उत्तर कोरिया को मार्च में हुई कार्रवाई की वजह से एक स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं.

बढ़ता तनाव

साझा अभ्यास में शामिल एक युद्दपोत पर सवार बीबीसी संवाददाता जॉन सडवर्थ का कहना है कि शक्ति प्रदर्शन का उद्देश्य उत्तर कोरिया के सैन्य और राजनीतिक हलकों में खलबली पैदा करना है.

लेकिन कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के शक्ति प्रदर्शन से उत्तर कोरिया में कड़ा रूख रखनेवालों की जमात एकजुट हो जाएगी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उत्तर कोरिया की बयानबाज़ी में नया कुछ नहीं है लेकिन बढ़ता तनाव चिंता का विषय है और चीन ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है.

Image caption उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियार के इस्तेमाल की धमकी दी है.

बढ़ते तनाव के बीच दक्षिण कोरिया के सैनिक अधिकारियों ने कहा है कि वो उत्तर कोरिया की सीमा पर नज़र रखे हुए हैं और फ़िलहाल किसी तरह की चिंताजनक गतिविधि नहीं नज़र आई है.

उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा आयोग ने इस साझा सैनिक अभ्यास की कड़ी निंदा करते हुए कहा है, “ये कुछ नहीं बल्कि उकसाने वाली कार्रवाई है और ताकत के बल पर उत्तर कोरिया को दबाने की कोशिश है.”

सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी का कहना है, “जब भी ज़रूरत होगी उत्तर कोरिया की सेना और उसके लोग परमाणु हथियारों के साथ जवाबी युद्ध की शुरूआत करेंगे जिससे स्थिति को युद्ध की ओर ले जा रहे साम्राज्यवादी अमरीका और उसके पिठ्ठू दक्षिण कोरिया को रोका जा सके.”

अमरीका ने कहा है कि वो “उत्तर कोरिया के साथ शब्द-युद्ध में नहीं उलझना चाहता.”

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