तालिबान को सहयोग दिया पाकिस्तान ने

अफ़गानिस्तान
Image caption अफ़गानिस्तान में बड़ी संख्या में आम लोग मारे गए हैं.

अमरीकी सैन्य दस्तावेज़ों के आधार पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान अफ़गानिस्तान में तालिबान चरमपंथियों को सहयोग देता रहा है.

हालांकि अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी ने इन आरोपों को बेबुनियाद क़रार दिया है और कहा है कि पाकिस्तान अफ़गानिस्तान में आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में अपने सहयोगियों का साथ दे रहा है.

व्हाइट हाउस ने भी इस रिपोर्ट की आलोचना करते हुए कहा है कि यह नैटो और अफ़गान सैनिकों को मुश्किल में डाल सकती है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा है.

इस रिपोर्ट में 2004 से 2009 तक के सैन्य अभियान का ब्योरा है.

अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स, लंदन के गार्डियन और जर्मन पत्रिका डेर स्पिगल ने क़रीब नब्बे हज़ार सैन्य दस्तावेज़ों के आधार पर ये रिपोर्ट छापी है.

ये दस्तावेज़ वेबसाइट विकीलीक के ज़रिए मीडिया को लीक किए गए हैं.

रिपोर्ट में नैटो सैनिकों के अभियानों में मारे जा रहे अफ़गान नागरिकों के भी ब्यौरे हैं. साथ ही नैटो की इस चिंता के बारे में भी लिखा गया है कि कैसे पाकिस्तान और ईरान अफ़गानिस्तान में तालिबान चरमपंथियों को सक्रिय सहयोग दे रहा है.

इन दस्तावेज़ों के आधार पर न्यूय़ार्क टाइम्स, गार्डियन और डेर स्पिगल अख़बार ने में अफ़गानिस्तान युद्ध के बारे में जो विवरण छापे हैं वो युद्ध की एक घिनौनी और वीभत्स छवि पेश करते हैं.

अख़बारों में छपी रिपोर्टों में पिछले छह वर्षों में सेना और गुप्तचर विभागों के समक्ष आई चुनौतियों का सिलसिलेवार ब्योरा है.

हालांकि इस रिपोर्ट में कोई चौंकाने वाली बात नहीं है लेकिन यह युद्ध की कठिनाईयों को स्पष्ट करता है और बताता है कि कैसे आम लोगों का इसमें सबसे अधिक नुकसान हुआ है.

रिपोर्ट इतनी गंभीर है कि व्हाइट हाउस ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है और कहा है कि रिपोर्ट में 2004 से 2009 की अवधि के बारे में है और राष्ट्रपति ओबामा ने पिछले साल ही अफ़गानिस्तान में अमरीकी रणनीति में बदलाव किया है.

बीबीसी की कूटनीतिक संवाददाता ब्रिजेट कैंडाल का कहना है कि अमरीकी सैन्य रिकार्डों के माध्यम से लीक होकर आई हज़ारों पन्ने की यह जानकारी खुफिया जानकारी के इतिहास की सबसे बड़ी लीक मानी जा रही है.

अमरीकी सेना के साथ हुई हज़ारों घटनाओं और खुफिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार रिपोर्ट में 2004 से 2009 के बीच के समय की एक ऐसी छवि तैयार की गई है मानो ये कोई फ़िल्म हो.

न्यूयॉर्क टाइम्स और गार्डियन का कहना है कि वो मुख्य स्त्रोत से नहीं मिले हैं लेकिन सूत्र से मिलने वाली सूचना को वो विकीलीक नामक वेबसाइट पर डाली गई सूचना से कई हफ़्तों से मिलाते रहे हैं.

विकीलीक एक ऐसी वेबसाइट है जहां ऐसी जानकारियां रखी जाती हैं जो आम लोगों को न पता हो. विकीलीक आम तौर पर अमरीकी सैन्य अभियानों की आलोचना करती रही है.

रिपोर्टों के अनुसार अफ़गानिस्तान में तालिबान के पास एयरक्राफ्टों पर हमला करने वाले मिसाईल थे और सात ही उनके पास अमरीकी नौसेना और आर्मी के विशेष अभियान दलों के बारे में जानकारी रहती थी. इस विशेष दल का गठन तालिबान के बड़े चरमपंथियों को पकड़ने के लिए किया गया था.

दस्तावेज में बार बार बड़ी संख्या में चालकरहित विमान या ड्रोन के इस्तेमाल की बात कही गई है और साथ ही इस समस्या पर भी चर्चा की गई है कि कैसे तालिबान के इलाक़े में नष्ट होने वाले ड्रोन विमानों को तालिबान के हाथों से बचाया जाए.

रिपोर्टो में आम लोगों की मौतों के भी विवरण हैं और इन मौतों का कारण सड़कों के पास रखे बम और नैटो मिशन की गलती बताई गई है.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें रिपोर्टों और दस्तावेजों को पढने में समय लगेगा लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने इन रिपोर्टों की कड़ी भर्त्सना की है.

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